विस्तृत उत्तर
गीता जयंती प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस तिथि को मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार प्रायः नवंबर या दिसंबर माह में पड़ती है।
मान्यता है कि द्वापर युग में इसी पावन तिथि पर कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का दिव्य उपदेश दिया था। महाभारत के युद्ध से पूर्व जब अर्जुन अपने प्रियजनों को सामने खड़ा देखकर मोहग्रस्त हो गए और धनुष रख दिया, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें धर्म, कर्म और मोक्ष का वह शाश्वत ज्ञान दिया जो आज श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में सम्पूर्ण मानवजाति का मार्गदर्शन करता है। इसलिए इस तिथि को गीता जयंती — अर्थात भगवद्गीता के प्रकट होने का उत्सव — कहा जाता है।
गीता सनातन धर्म में एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है, क्योंकि यह स्वयं भगवान के श्रीमुख से प्रकट हुई वाणी है। इसके 18 अध्यायों और 700 श्लोकों में कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग और जीवन के प्रत्येक पहलू का विवेचन है।
इस दिन भक्त प्रातःकाल स्नान कर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं, गीता का पाठ और श्रवण करते हैं, मंदिरों में कीर्तन-प्रवचन होते हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन होता है जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। इस दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने से भी विशेष पुण्य माना गया है।