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विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भगवद्गीता के दशम अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अपनी विभूतियों का वर्णन करते हुए कहते हैं, “पितॄणामर्यमा चास्मि”, अर्थात पितरों में मैं अर्यमा हूँ। यह वचन पितृ तत्त्व की ईश्वरीय महत्ता को प्रमाणित करता है। अर्यमा देव पितरों के अधिपति माने गए हैं और पितृ-व्यवस्था में उनका स्थान अत्यंत ऊँचा है।
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