विस्तृत उत्तर
भगवद्गीता के आठवें अध्याय के सोलहवें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण एक अत्यंत महत्वपूर्ण उद्घोष करते हैं — आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन। अर्थात हे अर्जुन, भौतिक ब्रह्माण्ड के सर्वोच्च लोक ब्रह्मलोक (सत्यलोक) तक पहुँचने वाले सभी लोक वास्तव में दुखालय हैं और अंततः प्रलय के अधीन हैं। जो सकाम कर्मों के आधार पर वहाँ जाते हैं वे पुण्य क्षीण होने पर पुनः मृत्युलोक में लौट आते हैं। यह श्लोक सत्यलोक की नश्वरता और सीमितता को स्पष्ट करता है। गीता का यह संदेश यह है कि वास्तविक मोक्ष के लिए भौतिक ब्रह्माण्ड के किसी भी लोक में जाना पर्याप्त नहीं — उसके लिए सीधे भगवान के परम धाम (वैकुण्ठ) को प्राप्त करना आवश्यक है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





