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भगवद्गीता से जुड़े सभी प्रश्न(14)

भगवद्गीता पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 14 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

भगवद्गीता में महर्लोक के बारे में क्या कहा गया है?

गीता (८.१६) में कृष्ण कहते हैं आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन — ब्रह्मलोक तक सभी लोक पुनरावर्ती हैं। इसलिए महर्लोक भी अंतिम मंजिल नहीं है।

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लोक

भगवद्गीता में भुवर्लोक के बारे में क्या कहा गया है?

गीता (८.१६) में कृष्ण कहते हैं कि ब्रह्मलोक से भूलोक तक सभी लोक पुनरावर्ती हैं। भुवर्लोक में भी पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है।

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भक्ति एवं आध्यात्म

मेहनत करें या भगवान पर भरोसा रखें

भगवद्गीता के अनुसार दोनों एक साथ करने हैं — पूरी मेहनत करो, परंतु फल की चिंता भगवान पर छोड़ दो। यही कर्मयोग है। मेहनत छोड़ देना आलस्य है, और भगवान पर भरोसा छोड़ देना अहंकार — दोनों से बचना चाहिए।

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भक्ति एवं आध्यात्म

भाग्य और पुरुषार्थ में क्या संबंध है

भाग्य पूर्व कर्मों का परिणाम है और पुरुषार्थ वर्तमान का प्रयास। दोनों परस्पर पूरक हैं — भाग्य परिस्थितियाँ देता है, पुरुषार्थ उन्हें बदलता है। गीता में कर्म को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

#भाग्य#पुरुषार्थ#कर्म
भक्ति एवं आध्यात्म

अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है धार्मिक उत्तर

हिंदू धर्म के अनुसार अच्छे लोगों को बुरा इसलिए होता है क्योंकि वे अपने पूर्व जन्मों के प्रारब्ध कर्मों का फल भोग रहे होते हैं। वर्तमान में किया अच्छा कर्म भविष्य को सुधारता है। कभी-कभी कठिनाई भगवान की परीक्षा और परिष्कार का माध्यम भी होती है।

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कर्म सिद्धांत

कर्म का सिद्धांत क्या है हिंदू धर्म के अनुसार?

कर्म सिद्धांत: प्रत्येक क्रिया का फल मिलता है। गीता में कर्मयोग — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'। निष्काम कर्म मोक्ष का मार्ग, राग-द्वेष युक्त कर्म बंधनकारी। यह पुरुषार्थ का सिद्धांत है, भाग्यवाद नहीं।

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लोक

विभूति योग क्या है?

गीता का दसवां अध्याय।

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लोक

भगवान कृष्ण ने गीता में पितरों के बारे में क्या कहा है?

गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि पितरों में वे अर्यमा हैं।

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लोक

भगवद्गीता के अनुसार अधोलोकों में कौन जाते हैं?

गीता के अनुसार तमोगुणी और जघन्य गुणों में स्थित प्राणी नीचे के लोकों में जाते हैं।

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लोक

भगवद्गीता में सत्यलोक के बारे में क्या कहा गया है?

गीता (8.16) में कृष्ण कहते हैं — 'आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन' — ब्रह्मलोक (सत्यलोक) तक सभी लोक नश्वर हैं। सकाम कर्मी वहाँ से भी वापस आते हैं।

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अवतारवाद

भगवद्गीता में अवतार का क्या प्रयोजन बताया गया है?

भगवद्गीता: 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत...' अर्थ: जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है — तब-तब साधुओं की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की संस्थापना के लिए अवतार होता है।

#भगवद्गीता#अवतार प्रयोजन#धर्म संस्थापना
सावधानियाँ

कालसर्प दोष में तामसिक प्रयोग क्यों नहीं करने चाहिए?

भगवद्गीता के अनुसार शत्रु-नाश या स्वार्थ के लिए तामसिक प्रयोग करने वाले 'आसुरी-निष्ठा' वाले कहलाते हैं और उनका पतन निश्चित है — ये प्रयोग आम साधकों के लिए सर्वथा निषिद्ध हैं।

#तामसिक प्रयोग#आसुरी निष्ठा#भगवद्गीता
महाभारत

कृष्ण ने अर्जुन को गीता क्यों सुनाई?

कुरुक्षेत्र में युद्ध से पहले अर्जुन अपने स्वजनों को देखकर मोह और शोक में डूब गए और युद्ध करने से इनकार कर बैठे। उनके इस अज्ञानजनित मोह को दूर करने और धर्म के सही स्वरूप को समझाने के लिए श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया।

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पर्व एवं त्योहार

गीता जयंती कब और क्यों मनाते हैं?

गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी) को मनाई जाती है। इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है।

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