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विस्तृत उत्तर
भगवद्गीता में भगवान कृष्ण स्वयं अवतार का प्रयोजन बताते हुए कहते हैं:
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
अर्थात् हे भारत! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं साधुओं की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की संस्थापना के लिए युग-युग में अवतार लेता हूँ।
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