विस्तृत उत्तर
अवतार का शाब्दिक अर्थ है — परम सत्ता का भौतिक जगत में 'अवरोहण' (नीचे उतरना)। भगवान अपने परम धाम को छोड़कर स्वेच्छा से माया का आश्रय लेकर साकार रूप में प्रकट होते हैं।
श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध के तृतीय अध्याय में भगवान विष्णु के अवतारों का अत्यंत विस्तृत और रहस्यमयी वर्णन किया गया है। यद्यपि भगवान के अवतार असंख्य हैं, किंतु प्रमुख रूप से २४ अवतारों का उल्लेख किया गया है, जो सृष्टि के विकास और धर्म-रक्षा के विभिन्न चरणों को दर्शाते हैं।





