विस्तृत उत्तर
कर्ण को ब्रह्मास्त्र चलाने से किसी ने नहीं रोका — बल्कि वे स्वयं उस निर्णायक क्षण में ब्रह्मास्त्र का मंत्र याद करने में असमर्थ हो गए। यही परशुराम के श्राप का प्रभाव था।
कर्ण ने गुरु परशुराम से ब्रह्मास्त्र सहित समस्त दिव्यास्त्र विद्याएं सीखी थीं। परंतु जब परशुराम को ज्ञात हुआ कि कर्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण करके छल से विद्या ग्रहण की है, तब उन्होंने श्राप दिया — 'जब तुम्हें इस विद्या की सर्वाधिक आवश्यकता होगी, उसी समय तुम सभी मंत्र भूल जाओगे — और वही तुम्हारा अंत होगा।'
महाभारत के 17वें दिन, जब कर्ण और अर्जुन के बीच निर्णायक युद्ध हुआ, उसी समय उनके रथ का पहिया भूमि में धँस गया (यह दूसरा श्राप — ब्राह्मण के गाय की हत्या के कारण)। इस कठिन परिस्थिति में कर्ण ने ब्रह्मास्त्र चलाना चाहा — परंतु परशुराम के श्राप के प्रभाव से वे मंत्र याद नहीं कर पाए।
इस प्रकार परशुराम का श्राप अपना काम कर गया — ठीक उसी समय जब कर्ण को सबसे अधिक आवश्यकता थी, वह विद्या उनके काम न आई।




