ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
19 अप्रैल 2026

19 अप्रैल 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

19 अप्रैल 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल द्वितीया
नक्षत्र
भरणी
योग
आयुष्मान
करण
कौलव
वार
रविवार
हिन्दू मास
वैशाख
ऋतु
वसन्त
सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
18:49

आज के पर्व

परशुरामतृतीया

19 अप्रैल 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

विष्णु जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा है

विष्णु-पूजा के लिए — गुरुवार (प्रमुख दिन, पीले वस्त्र और केले का भोग), एकादशी (प्रिय तिथि), वैशाख और कार्तिक मास (विशेष पुण्यकारी)। जन्माष्टमी और रामनवमी अवतार-पर्व हैं।

वैष्णवास्त्र किन-किन के पास था?

वैष्णवास्त्र श्री राम, मेघनाद, परशुराम, भगदत्त (नरकासुर पुत्र) और प्रद्युम्न (कृष्ण पुत्र) के पास था।

भार्गवास्त्र और इंद्रास्त्र में क्या संबंध है?

भार्गवास्त्र को इंद्रास्त्र का उन्नत और अधिक शक्तिशाली संस्करण माना जाता है जिसे परशुराम ने निर्मित किया था।

द्रोणाचार्य के पास कौन-कौन से अस्त्र थे?

द्रोणाचार्य के पास परशुराम से प्राप्त संपूर्ण अस्त्र-शस्त्र ज्ञान था — ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र, नारायणास्त्र, प्रस्वापनास्त्र, आंगिरस धनुष सहित सभी प्रमुख दिव्यास्त्र।

भार्गवास्त्र किसने बनाया था

भार्गवास्त्र भगवान परशुराम (भार्गव) की अस्त्र-सिद्धि से उत्पन्न उनका अपना विशिष्ट दिव्यास्त्र है। यह उनके वंश-नाम 'भार्गव' पर आधारित है। शिव की शिक्षा और अपनी तपस्या से यह अस्त्र सिद्ध किया गया।

भार्गवास्त्र क्या है

भार्गवास्त्र परशुराम (भृगु-वंशज/भार्गव) का विनाशकारी दिव्यास्त्र है जो एक साथ अनेक विध्वंसक अस्त्रों की वर्षा करता है। कर्ण ने इससे पांडव सेना की पूरी अक्षौहिणी नष्ट कर दी थी।

परशुराम ने कृष्ण को सुदर्शन चक्र क्यों दिया

परशुराम ने कृष्ण को सुदर्शन इसलिए दिया क्योंकि श्रीकृष्ण विष्णु के पूर्ण अवतार थे और यह चक्र मूलतः विष्णु का ही था। द्वापर में अधर्म-नाश के लिए इस चक्र का सही उत्तराधिकारी कृष्ण थे।

परशुराम ने सुदर्शन चक्र कैसे प्राप्त किया

सुदर्शन चक्र शिव → विष्णु → पार्वती → अग्नि → वरुण की परंपरा से परशुराम को मिला। परशुराम भगवान विष्णु के अवतार हैं इसलिए यह चक्र उनके पास धरोहर के रूप में था।

परशुराम के फरसे का नाम क्या है?

परशुराम के फरसे का नाम 'परशु' है, और शास्त्रों में इसे 'विद्युदभि' भी कहा जाता है। यह शिव-प्रदत्त दिव्य फरसा था जिसके कारण वे 'परशुराम' कहलाए।

भीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र चलाया तो क्या हुआ?

भीष्म ने परशुराम पर आग्नेयास्त्र चलाया था लेकिन परशुराम ने वरुणास्त्र से उसे शांत कर दिया। यह गुरु-शिष्य के बीच दिव्यास्त्र द्वंद्व का उदाहरण है।

कर्ण को वरुणास्त्र कैसे मिला?

कर्ण को वरुणास्त्र कुछ मतों के अनुसार परशुराम से मिला था जबकि अन्य मतों के अनुसार विभिन्न यक्षों, राक्षसों और देवों से भी उन्होंने अस्त्र प्राप्त किए थे।

पाशुपतास्त्र किन-किन के पास था?

पाशुपतास्त्र भगवान शिव के अलावा केवल चार महापुरुषों के पास था — अर्जुन, मेघनाद (इंद्रजीत), परशुराम और विश्वामित्र।

शिव का फरसा परशुराम को कैसे मिला

परशुराम ने शिव की घोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर धर्म-रक्षा के लिए दिव्य परशु (फरसा) दिया और उसे उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इसी से वे 'परशुराम' कहलाए।

विजय धनुष कर्ण को किसने दिया था?

विजय धनुष परशुराम ने कर्ण को दिया था — शाप के बाद दया में। आशीर्वाद था कि जब तक यह हाथ में रहे, कोई नहीं जीत सकता। इसीलिए कर्ण के हाथ से विजय छूटने पर ही उसका वध संभव हुआ।

कर्ण के धनुष का नाम क्या था?

कर्ण के धनुष का नाम 'विजय' था जिसे परशुराम ने उसे दिया था। यह अखंड था, पाशुपतास्त्र से भी इसका घेरा नहीं टूटता था। यह धनुष न होने पर ही कर्ण का वध हो सका।

रविवार को नमक क्यों नहीं देना चाहिए?

ज्योतिष के अनुसार रविवार सूर्य का दिन है और नमक सूर्य से जुड़ा है। रविवार को नमक देने से सूर्य कमजोर होता है — आत्मविश्वास में कमी और बरकत जाने की मान्यता है। यह लोक-मान्यता आधारित है।

युगादि तिथि क्या होती है?

जिस तिथि को युगारंभ से जोड़ा जाए, वह युगादि तिथि कही जाती है।

तृतीया श्राद्ध वरार्थिनी क्यों है?

तृतीया तिथि वरदान देने वाली मानी गई है, इसलिए वरार्थिनी है।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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