ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
2 अगस्त 2026

2 अगस्त 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

2 अगस्त 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपद
योग
अतिगंड
करण
बव
वार
रविवार
हिन्दू मास
श्रावण
ऋतु
वर्षा
सूर्योदय
05:43
सूर्यास्त
19:11

आज के पर्व

संकष्टी

2 अगस्त 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

गणपति अथर्वशीर्ष 21 बार पढ़ने से क्या होता है?

संकष्टी पर 21 बार=दोगुना फल, बिगड़े काम बनें। अथर्वशीर्ष: 1000 बार=सभी कामना सिद्ध। महाविघ्न/महापाप मुक्ति। दैनिक 1, बुधवार विशेष। विद्यार्थी/व्यापारी/सभी।

श्रावण मास में प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने का नियम क्या है?

प्रातःकाल सर्वोत्तम। गंगाजल श्रेष्ठ, शुद्ध जल भी स्वीकार्य। तांबे/कांसे/मिट्टी के लोटे से (शंख वर्जित)। 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए। जलाधारी उत्तर दिशा। शिव पुराण: 'जलेन वृष्टिमाप्नोति' = धन प्राप्ति। केवल सोमवार नहीं, प्रतिदिन चढ़ाएं। निर्माल्य जल ग्रहण न करें।

श्रावण मास में शिव मंत्र जप का अनुष्ठान कैसे करें?

संकल्प → सवा लाख (1,25,000) या यथाशक्ति → दैनिक ÷30 → ब्रह्ममुहूर्त/प्रदोष → रुद्राक्ष माला → सात्विक नियम → समापन: हवन+दान। सरल: 108/दिन पूरे सावन = ~3,240। 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय।

रविवार को नमक क्यों नहीं देना चाहिए?

ज्योतिष के अनुसार रविवार सूर्य का दिन है और नमक सूर्य से जुड़ा है। रविवार को नमक देने से सूर्य कमजोर होता है — आत्मविश्वास में कमी और बरकत जाने की मान्यता है। यह लोक-मान्यता आधारित है।

चौथ भरणी क्या होती है?

चतुर्थी पर भरणी नक्षत्र का श्राद्ध चौथ भरणी कहलाता है।

तांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

तांत्रिक पूजा के लिए शनिवार और रविवार सबसे उत्तम दिन हैं — निशिता काल (मध्यरात्रि) में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

कैलाश वास तिथि पर रुद्राभिषेक करने से क्या होता है?

कैलाश वास तिथि (चतुर्थी, एकादशी, पंचमी, द्वादशी) पर रुद्राभिषेक करने से मनोकामना सिद्धि, सुख-समृद्धि और आनंद वृद्धि होती है — यह शुभ तिथि मानी जाती है।

संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब होता है?

यह व्रत हर हिंदू महीने के 'कृष्ण पक्ष' (अंधेरे पखवाड़े) की चतुर्थी (चौथी) तिथि को रखा जाता है।

श्रावण मास में क्या खाना वर्जित है?

श्रावण में मांसाहार, हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, गोभी), प्याज-लहसुन, बैंगन, कच्चा दूध-दही, कढ़ी और नशीले पदार्थ वर्जित हैं। शास्त्र और वैज्ञानिक दोनों आधार पर सात्विक भोजन का पालन करना इस मास का विशेष नियम है।

रविवार को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए क्यों?

रविवार को माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उस दिन पत्ते तोड़ना या जल चढ़ाना उनके व्रत को खंडित करना माना जाता है। विष्णु पुराण में यह स्पष्ट वर्जित है।

सूर्य ग्रह मजबूत करने रविवार उपाय

रविवार: अर्घ्य+आदित्य हृदय+'ॐ सूं सूर्याय नमः' 108+लाल वस्त्र+गुड़/गेहूं दान+माणिक+पिता सम्मान+गायत्री।

रविवार को लाल रंग पहनने का महत्व

रविवार = लाल/केसरिया (सूर्य)। तेज, अधिकार, स्वास्थ्य, नेतृत्व। सूर्य पूजा, अर्घ्य। माणिक रत्न। ज्योतिष परंपरा।

नाग पंचमी पर बामी की पूजा क्यों करते हैं

बामी पूजा: (1) बामी=नागों का निवास — घर जाकर पूजा। (2) पाताल मार्ग। (3) शिव-नाग सम्बन्ध (श्रावण)। (4) कृषि रक्षा — नाग=फसल मित्र। दूध+हल्दी+कुमकुम बामी पर। सर्प को जबरन दूध वर्जित — हानिकारक।

श्रावण मास में मांसाहार का त्याग क्यों करते हैं?

श्रावण मांस त्याग: शिव मास (सात्त्विक), वर्षा=प्रजनन काल (जैवविविधता), आयुर्वेद (अग्नि मंद, गरिष्ठ=रोग), कीटाणु वृद्धि, साधना काल=शुद्ध आहार। चातुर्मास=4 माह त्याग।

श्रावण मास में हरियाली तीज का क्या महत्व है?

हरियाली तीज: शिव-पार्वती मिलन दिवस, सुहागन व्रत (पति दीर्घायु), हरियाली=वर्षा नवजीवन, झूला (पार्वती), मायके सम्बंध (सिंधारा)। श्रावण शुक्ल तृतीया। राजस्थान/जयपुर सवारी प्रसिद्ध।

श्रावण मास के व्रत और नियम क्या हैं

श्रावण नियम: प्रत्येक सोमवार शिव व्रत + शिवलिंग जलाभिषेक। मंगलवार = मंगला गौरी। नाग पंचमी, हरियाली तीज, रक्षाबन्धन। नित्य 'ॐ नमः शिवाय' जप, बिल्वपत्र, कांवड़ यात्रा। साग त्याग, सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य। शिव का सबसे प्रिय मास।

कामिका एकादशी व्रत कैसे रखें

कामिका एकादशी: श्रावण कृष्ण एकादशी। दशमी एक-समय भोजन → एकादशी निराहार/फलाहार → विष्णु पूजा (तुलसी विशेष) → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कथा → रात्रि जागरण → द्वादशी पारण। तुलसी = सहस्र गोदान पुण्य। शिव+विष्णु कृपा।

पुत्रदा एकादशी व्रत कैसे रखें

पुत्रदा एकादशी: श्रावण/पौष शुक्ल एकादशी = सन्तान प्राप्ति हेतु। निराहार/फलाहार → विष्णु/बालकृष्ण पूजा → सन्तान गोपाल मंत्र → कथा → जागरण → द्वादशी पारण। कथा: सन्तानहीन राजा महीजित को व्रत से पुत्र प्राप्ति। दम्पति साथ करें।

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