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14 सितंबर 2026

14 सितंबर 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

14 सितंबर 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

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आज के पर्व

हरतालिकागणेश

14 सितंबर 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

गणेश जी की पूजा से बुद्धि कैसे बढ़ती है?

गणेश = ज्ञानमय (अथर्वशीर्ष)। स्वरूप: बड़ा सिर=बुद्धि, बड़े कान=ज्ञान ग्रहण, एक दांत=एकाग्रता। मूलाधार चक्र अधिपति → कुण्डलिनी → बुद्धि चक्र सक्रिय। बुध ग्रह संबंधित → बुद्धि कारक। उपाय: 108 जप, दूर्वा, अथर्वशीर्ष, बुधवार व्रत।

गणेश जी का 'ग्लौम' बीज मंत्र और उसका प्रभाव

'ग्लौं' पृथ्वी तत्व का बीज मंत्र है। इसके उच्चारण से जीवन, व्यापार और बुद्धि में स्थिरता आती है और जड़ जमा चुके बड़े-बड़े विघ्न आसानी से नष्ट हो जाते हैं।

संकट चतुर्थी व्रत की विधि और कथा क्या है?

कृष्ण पक्ष चतुर्थी (मासिक)। संध्या पूजा, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, कथा श्रवण। चंद्रोदय बाद पारण। कथा: ब्राह्मण→व्रत→संकट दूर। माघ चतुर्थी सर्वश्रेष्ठ।

लक्ष्मी जी की पूजा में गणेश जी को पहले क्यों पूजते हैं?

गणेश = प्रथम पूज्य (ब्रह्मा वरदान — बिना गणेश = विघ्न)। रिद्धि-सिद्धि पति + लक्ष्मी = सम्पूर्ण समृद्धि। बुद्धि पहले → धन बाद। दीपावली: गणेश→लक्ष्मी→सरस्वती→कुबेर।

गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?

तुलसी ने विवाह प्रस्ताव → गणेश ने मना → तुलसी शाप → गणेश प्रति-शाप: 'मेरी पूजा में तुम वर्जित।' गणेश = दूर्वा; विष्णु = तुलसी। कुछ दक्षिण परंपरा में मान्य।

चंद्र देव की पूजा कैसे करें?

सोमवार शाम/रात, चंद्र दर्शन, सफ़ेद फूल+दूध। 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे' 108। चावल/दूध/चांदी दान। पूर्णिमा सर्वोत्तम। मोती(ज्योतिषी)। शांति/नींद/माता सुख।

गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है और कितनी चढ़ाएं?

अनलासुर निगलने → अग्नि ताप → 88,000 ऋषियों ने दूर्वा दी → शीतलता। 21 दूर्वा सर्वप्रचलित। 3/5 पत्ती गांठ, ताजी हरी, जड़ सहित। 101 = विशेष।

गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ कब और कैसे करें?

अथर्ववेद उपनिषद्। चतुर्थी/बुधवार/प्रतिदिन। 1 बार शुभ, 11 बार सर्वसिद्धि। दूर्वा+मोदक+लाल फूल। शुद्ध उच्चारण। फल: 'ब्रह्मभूयाय कल्पते' — ब्रह्म प्राप्ति। सर्वशक्तिमान गणेश स्तोत्र।

महाभारत किसने लिखा?

महाभारत के रचयिता: महर्षि वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन)। गणेश ने लेखनी से लिखा — परंपरागत आख्यान। एक लाख श्लोक, 18 पर्व। भगवद्गीता इसी का अंश। 'पंचम वेद' कहलाता है। व्यास ने 18 पुराण और ब्रह्मसूत्र भी रचे।

शिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?

शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।

रुका हुआ काम बनाने का गणेश मंत्र

लंबे समय से अटके या रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए भगवान गणेश के मंत्र 'ॐ वक्रतुण्ड महाकाय...' का उच्चारण कर घर से दायां पैर पहले बाहर निकालना चाहिए।

बच्चों का पढ़ाई में मन लगाने का मंत्र

बच्चों की चंचलता दूर कर पढ़ाई में मन लगाने के लिए, अध्ययन शुरू करने से पूर्व उनसे विघ्नहर्ता गणेश के मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' का 11 बार उच्चारण करवाना चाहिए।

कर्ज उतारने का रामबाण मंत्र

कर्ज के जाल से शीघ्र बाहर निकलने के लिए मंगल देव के मंत्र 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' और गणेश जी के 'ऋणहर्ता मंत्र' का नियमित रूप से जप करना रामबाण उपाय है।

बच्चों की बुद्धि और याददाश्त बढ़ाने का मंत्र

बच्चों की चंचलता दूर कर स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए उनसे प्रतिदिन माता सरस्वती के 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः' और गणेश मंत्र का उच्चारण करवाना चाहिए।

गणेश जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?

पौराणिक कथा: बालक गणेश ने माता पार्वती देखकर पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया (शिव प्रसन्नता हेतु) — शिव-पार्वती प्रसन्न, परंपरा आरंभ। अन्य: सिंदूर = शक्ति/शुभता। गणेश = मूलाधार चक्र अधिपति (लाल रंग)। शुद्ध सिंदूर ललाट + उदर पर लगाएं।

अविवाहित लड़की सोमवार व्रत रख सकती क्या?

हाँ — विशेष शुभ। 16 सोमवार=अच्छा वर। पार्वती ने शिव हेतु व्रत किया। श्रावण सोमवार विशेष। शिवलिंग स्पर्श=परंपरा भिन्न (शास्त्रीय निषेध नहीं)। शिव=अर्धनारीश्वर।

गणेश जी को मोदक भोग क्यों प्रिय है — पौराणिक कारण?

शिव-पार्वती प्रतियोगिता: गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा = ब्रह्मांड → विजयी → मोदक पुरस्कार। 'मोद' = आनंद। 21 मोदक। गुड़+नारियल/खोया।

गणेश जी की पूजा से विघ्न कैसे दूर होते हैं?

गणेश = विघ्नहर्ता + विघ्नेश्वर। शिव पुराण: प्रथम पूज्य वरदान — बिना गणेश पूजा कार्य अशुभ। अथर्वशीर्ष: 'ध्यान से सर्व विघ्न मुक्ति, महाविघ्न से भी।' विघ्न अधिपति: पूजा = विघ्न हटाएं, उपेक्षा = विघ्न आएं। उपाय: 108 जप, दूर्वा, मोदक, बुधवार/चतुर्थी पूजन।

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