भगवान विष्णु नाम मंत्र
नारायण
सत्य की परम अनुभूति, परम कल्याण, अज्ञान का नाश एवं बैकुंठ लोक की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सत्य की परम अनुभूति, परम कल्याण, अज्ञान का नाश एवं बैकुंठ लोक की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
सत्य की परम अनुभूति, परम कल्याण, अज्ञान का नाश एवं बैकुंठ लोक की प्राप्ति
जाप विधि
सूर्य को जल अर्पण करते समय या ध्यान में बैठकर एकाग्रता से मानसिक जप।
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ॐ ऐं क्लीं सौः
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
beej mantraवं, शं, षं, सं
ugra mantraॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्यै फट् स्वाहा
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
stotra mantraसर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि । सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29