पर्वशरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों का क्या विशेष प्रभाव हैशरद पूर्णिमा चन्द्र प्रभाव: (1) 16 कलाओं से पूर्ण — अन्य पूर्णिमाओं में नहीं। (2) गीता 15.13: 'सोमो भूत्वा रसात्मकः' — अमृत वर्षा। (3) आयुर्वेद: पित्त शमन, औषधि निर्माण। (4) BHU शोध: लैक्टिक अम्ल + स्टार्च चन्द्रकिरणें अवशोषित करते हैं। (5) पेरिजी + स्वच्छ वातावरण = तीव्र किरणें। अस्थमा, नेत्र, चर्म लाभ।#शरद पूर्णिमा#चन्द्रमा#अमृत वर्षा
त्योहार पूजाकरवा चौथ पर चंद्रमा देखकर व्रत क्यों खोलते हैं?चन्द्र दर्शन क्यों: चन्द्र = अमरता प्रतीक (क्षय बाद पुनः पूर्ण), शिव मस्तक (शिव-पार्वती पर्व), चतुर्थी तिथि देवता। कथा: वीरवती ने बिना चन्द्र देखे व्रत खोला → पति मृत्यु → सही चन्द्रोदय पर पारण → पति जीवित। छलनी = शुद्ध दृष्टि।#करवा चौथ चंद्रमा#चन्द्र दर्शन#व्रत पारण
व्रतपूर्णिमा व्रत कैसे रखें और पूजा कैसे करेंपूर्णिमा व्रत: प्रातः स्नान → संकल्प → निराहार/फलाहार/एकभुक्त। पूजा: गणपति → सत्यनारायण/विष्णु → रात्रि चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → सत्यनारायण कथा → दान। विशेष: गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा।#पूर्णिमा#व्रत#चन्द्र
ग्रह दोष शांतिचंद्र ग्रह शांति के लिए कौन सा उपाय करें?चन्द्र शांति: शिव पूजन-अभिषेक (सर्वश्रेष्ठ) → 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः' 11000 जप → पलाश समिधा-दूध-चावल हवन → सोमवार व्रत → दान (चावल, दूध, चाँदी, मोती) → माता सेवा (सबसे प्रभावी व्यावहारिक उपाय)।#चंद्र ग्रह#चंद्र शांति#सोमवार
रत्न शास्त्रमोती माला से चंद्र शांत होता है क्या?हाँ — मोती=चंद्र(मन)। शांति, अनिद्रा दूर। कनिष्ठा, चांदी, सोमवार, 'ॐ चंद्राय नमः'। 10-15 दिन। कर्क विशेष।#मोती#चंद्र#शांति
गर्भ संस्कारप्रेग्नेंसी में चंद्रमा पूजा का क्या लाभ?चंद्र=मन+माता+शिशु कारक। शांति(हार्मोनल तनाव कम), शिशु स्वस्थ+सुंदर। सोमवार व्रत, पूर्णिमा 'ॐ सोम सोमाय' 108। दूध/सफ़ेद=चंद्र प्रिय। चंद्र प्रकाश=Melatonin/नींद। डॉक्टर=प्राथमिक।#गर्भावस्था#चंद्रमा#पूजा
ग्रह मंत्रचंद्र गायत्री मंत्र का जप मन शांति के लिए कैसे करें?'ॐ पद्मध्वजाय विद्महे...तन्नो सोमः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः' 11,000। सोमवार, श्वेत वस्त्र, मोती/स्फटिक। चंद्र = मन कारक — बलवान चंद्र = स्थिर मन। शिव पूजा + दूध दान।#चंद्र#गायत्री#मन शांति
शिव पर्वसोम प्रदोष और शनि प्रदोष में शिव पूजा कैसे अलग होती है?सोम प्रदोष: सर्वश्रेष्ठ — दूध अभिषेक, चंद्र दोष शांति, मनोकामना, दाम्पत्य सुख। शनि प्रदोष: शनि दोष निवारण — तिल तेल दीपक, सरसों तेल अभिषेक, साढ़ेसाती/ढैय्या मुक्ति। दोनों में प्रदोष काल (संध्या) पूजा समान।#सोम प्रदोष#शनि प्रदोष#त्रयोदशी
ज्योतिर्लिंगसोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने रोहिणी-पक्षपात के कारण क्षय रोग का श्राप दिया। प्रभास क्षेत्र में शिव की घोर तपस्या के बाद शिव ने वरदान दिया — शुक्ल पक्ष में बढ़ेंगे, कृष्ण पक्ष में घटेंगे। चंद्र (सोम) के नाम पर शिवलिंग 'सोमनाथ' कहलाया।#सोमनाथ#चंद्रमा#दक्ष श्राप