लोकस्वर्लोक के लोकालोक पर्वत का क्या महत्व है?लोकालोक पर्वत स्वर्लोक और भूलोक की सबसे बाहरी सीमा है जो प्रकाश और अंधकार को विभाजित करती है। इसके आगे 'अलोक-वर्ष' है जहाँ कोई जीव नहीं रहता।#लोकालोक पर्वत#स्वर्लोक#प्रकाश सीमा
दिव्यास्त्रपर्जन्यास्त्र का मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या था?काले बादलों का अचानक घिरना, बिजली की कड़क और मूसलाधार वर्षा शत्रु सेना में भय और अनिश्चितता पैदा करती थी जिससे उनका मनोबल टूट जाता था।#पर्जन्यास्त्र#मनोवैज्ञानिक
लोकभुवर्लोक के निचले हिस्से में तमोगुणी सत्ताएं क्यों रहती हैं?निचले भुवर्लोक का धुंधलापन और अंधकार तमोगुणी सत्ताओं के अनुकूल है। साथ ही तमोगुण उन्हें उच्च लोकों तक जाने से रोकता है इसलिए वे यहीं रहती हैं।#भुवर्लोक#तमोगुण#निचला हिस्सा
लोकप्रकाश और अंधकार कब अलग हुए?विष्णु की प्रथम श्वास से गति आने पर प्रकाश और अंधकार अलग हुए।#प्रकाश#अंधकार#द्वैत
लोकपिशाच कहाँ निवास करते हैं?पिशाच श्मशान, अंधकारमय और अशुद्ध स्थानों में निवास करते हैं।#पिशाच निवास#श्मशान#अंधकार
लोकनागों की मणियाँ पाताल को कैसे प्रकाशित करती हैं?महानागों के फनों की मणियाँ अपनी रोशनी से पाताल की कंदराओं और नगरियों का अंधकार मिटाती हैं।#नागमणि#पाताल प्रकाश#महानाग
लोकनागों की मणियाँ तलातल को कैसे प्रकाशित करती हैं?नागों की फण-मणियों से तेज दिव्य प्रकाश निकलता है, जो तलातल को प्रकाशित रखता है।#नाग मणि#तलातल#दिव्य प्रकाश
लोकतलातल में अंधकार क्यों नहीं रहता?तलातल में नागों की दिव्य मणियों का प्रकाश अंधकार को नष्ट कर देता है।#तलातल#अंधकार#नाग मणि
लोकजनलोक में अंधकार होता है क्या?नहीं, जनलोक आत्मिक तेज और परब्रह्म की ज्योति से प्रकाशित रहता है।#जनलोक#अंधकार#प्रकाश
जीवन एवं मृत्युअंध तामिस्र नरक में अंधकार का क्या वर्णन है?अंधतामिस्र में अंधकार — तामिस्र से भी गहरा 'परम अंधकार'। न प्रकाश, न आवाज, न स्पर्श — केवल भयावह एकाकीपन। 'चुगली करने वालों को अंधेरे में तड़पाया जाता है।' पाप के ज्ञान-नाश का प्रतीक।#अंध तामिस्र#अंधकार#नरक
जीवन एवं मृत्युतामिस्र नरक में जीव को कैसे रखा जाता है?तामिस्र में — अंधकारमय गुफा में बंद, कोई प्रकाश नहीं, लोहे की छड़ों से लगातार पिटाई, ऊपर से कौवे-उल्लू नोचते हैं। 'कोई शांति नहीं — केवल तड़प।'#तामिस्र नरक#अंधकार#यातना विधि
जीवन एवं मृत्युतामिस्र नरक क्या है?तामिस्र = 'घना अंधकार'। 21 प्रमुख नरकों में प्रथम। अंधकारमय गुफा, लोहे की पट्टियों-मुग्दरों से पिटाई। चोरों और धोखेबाजों के लिए यह नरक है।#तामिस्र नरक#परिभाषा#अंधकार
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को अंधकार में रखा जाता है?हाँ। तामिस्र नरक (अंधकारमय गुफा), अंधतामिस्त्र नरक (परम अंधकार, अधर्म के लिए), अंधतोमिस्र नरक (चुगली पर अंधेरे में तड़पाना)। पाप ज्ञान नष्ट करता है — इसीलिए अंधकार।#नरक#अंधकार#तामिस्र
जीवन एवं मृत्युनरक में अंधकार का क्या वर्णन है?नरक में तामिस्त्र और अंधतामिस्त्र घोर अंधकार के नरक हैं। अंधकूप में ज्ञान-अहंकारियों को डाला जाता है। नरक का अंधकार जीव के ज्ञान-अभाव और अज्ञान का प्रतीक है।#नरक#अंधकार#तामिस्त्र
जीवन एवं मृत्युयमदूतों का काला स्वरूप क्या संकेत देता है?यमदूतों का काला रंग अज्ञान, पाप और अंधकार का प्रतीक है। यह पापकर्मों के परिणाम की दिशा को इंगित करता है। विष्णुदूत प्रकाशमान होते हैं — यह प्रकाश-अंधकार का, पुण्य-पाप का स्पष्ट विभेद है।#यमदूत#काला#प्रतीक
तंत्र साधनाअमावस्या की रात तांत्रिक साधना क्यों प्रभावी मानी जाती है?अमावस्या तंत्र: अंधकार=शक्ति/काली काल, चन्द्रमा शून्य=मन शून्य (गहन ध्यान), पितर/उग्र शक्ति सक्रिय, राहु=सिद्धि, दश महाविद्या। गुरु दीक्षा अनिवार्य। सामान्य=तर्पण+दान+जप।#अमावस्या#तांत्रिक#अंधकार
मंदिर रहस्यमंदिर के गर्भगृह में अंधकार क्यों होता है इसका आध्यात्मिक कारण?गर्भगृह अंधकार: गुफा-तपस्या प्रतीक, बाह्य→अंतर्मुखी यात्रा (संसार→आत्मा), निराकार ब्रह्म प्रतीक, मन शांत (इन्द्रियाँ विरत), ऊर्जा संकेन्द्रण (आगम), गर्भ=आध्यात्मिक पुनर्जन्म। मंदिर=देवता देह, गर्भगृह=हृदय।#गर्भगृह#अंधकार#मंदिर वास्तु
शिव लीलापार्वती ने शिव की आँखें क्यों ढक दी थीं और उससे क्या हुआ?पार्वती ने शिव की आँखें खेल-भाव से ढकी थीं। इससे पूरे जगत में घोर अंधकार हो गया। सृष्टि बचाने के लिए शिव ने तीसरा नेत्र खोला। उसकी उष्मा से पार्वती के पसीने की बूँदों से एक भयंकर बालक 'अंधक' प्रकट हुआ।#पार्वती#शिव आँखें#अंधकार
ध्यान अनुभवध्यान में अंधकार दिखने का क्या अर्थ है?सामान्य। प्रारंभिक अवस्था, तमस→सत्व यात्रा, अवचेतन। Progression: अंधकार→रंगीन→नीला→सफेद। धैर्य — प्रकाश आएगा!#अंधकार#दिखना#अर्थ