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पितर से जुड़े सभी प्रश्न(86)

पितर पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 86 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक वर्णन

पितृ लोक क्या है और पितर वहाँ कैसे रहते हैं?

पितृलोक भुवर्लोक/चंद्रलोक में स्थित है (विष्णु पुराण)। गीता (9.25): पितृ-भक्त पितृलोक जाते हैं। गरुड़ पुराण अनुसार कर्मों के आधार पर प्राप्त होता है। श्राद्ध-तर्पण से पितरों को तृप्ति मिलती है। दक्षिण दिशा पितरों की।

#पितृ लोक#पितर#श्राद्ध
श्राद्ध विधि

अमावस्या पर तर्पण कैसे करें?

अमावस्या = पितरों का विशेष दिन। सूर्योदय से पहले स्नान, दक्षिण मुख, तिल-जल तर्पण (3 पीढ़ी)। कौवे+गाय को भोजन। पीपल जल। सात्विक भोजन। सोमवती/मौनी अमावस्या विशेष।

#अमावस्या#तर्पण#पितर
श्राद्ध विधि

श्राद्ध में दूध और दही का महत्व?

दूध: खीर (अनिवार्य), पिंड में, सोम प्रतीक = पितरों का आहार। दही: पंचामृत, पिंड पर, शीतलता। दूध+दही+मधु = पिंड अर्पण। गाय का दूध सर्वश्रेष्ठ।

#दूध#दही#श्राद्ध
श्राद्ध विधि

श्राद्ध में गाय को ग्रास देने का महत्व?

गाय = देवमाता (33 कोटि देव निवास)। गरुड़ पुराण: गो-ग्रास = पितर को वैतरणी नदी पार कराना। पंचबलि में गाय = देव भोग। हरा चारा/रोटी+गुड़ दें। गो-दान = सबसे बड़ा दान।

#गो ग्रास#श्राद्ध#गाय
माहेश्वर योग

नन्दी ने यह योग किनकी उपस्थिति में बताया था?

नन्दी ने यह योग देवताओं, ऋषियों और पितरों की सन्निधि में सनत्कुमार को बताया था।

#नन्दी#देवता#ऋषि
पितृ वंश

धरणी कौन थी?

धरणी मेरुराजपत्नी स्वधा से उत्पन्न यज्ञानुष्ठान में प्रवृत्त रहने वाली मानसी पुत्री थीं।

#धरणी#स्वधा#मेरुराजपत्नी
पितृ वंश

पितर कितने प्रकार के होते हैं?

पितर दो प्रकार के बताए गए हैं: अयज्वा और यज्वा।

#पितर#अग्निष्वात्त#बर्हिषद
दक्ष वंश

स्वाहा और स्वधा का विवाह किससे हुआ?

स्वाहादेवी को भगवान् अग्नि ने और स्वधादेवी को पितरों ने पत्नी रूप में स्वीकार किया।

#स्वाहा#स्वधा#अग्नि
पितृ काल

पितरों का एक वर्ष कितना होता है?

मनुष्यों के तीन सौ साठ महीनों का समय पितरों का एक संवत्सर माना गया है।

#पितर#पितृ वर्ष#संवत्सर
पितृ काल

पितरों का एक महीना कितना होता है?

मनुष्यों के तीस महीने का समय पितरों के एक मास के बराबर माना गया है।

#पितर#पितृ मास#मनुष्य महीना
पितृ काल

पितरों का एक दिन कितना होता है?

मनुष्यों का एक कृष्णपक्ष पितरों के एक दिन के बराबर बताया गया है।

#पितर#कृष्णपक्ष#शुक्लपक्ष
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव संन्यासी से क्यों रोए?

आत्मदेव संतान-अभाव के दुख से रोए; वे कहते हैं कि उनका सब कुछ सूना हो गया है और वे प्राण त्यागने आए हैं।

#आत्मदेव#संन्यासी#संतान दुख
लोक

श्राद्ध का अन्न योनि के अनुसार कैसे बदलता है?

योनि के अनुसार उपयुक्त आहार बनता है।

#अन्न रूपांतरण#गरुड़ पुराण#पितर
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में पितरों को अन्न कैसे पहुँचता है?

मंत्र और नाम-गोत्र से।

#श्राद्ध अन्न#मंत्र#पितर
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में क्रोध क्यों वर्जित है?

क्रोध से पितर निराश लौटते हैं।

#क्रोध#श्राद्ध निषेध#पितर
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण पितरों की दिशा है।

#दक्षिण दिशा#पितर#तर्पण
लोक

कौवा पितरों से कैसे जुड़ा है?

कौवा पितरों का प्रतीक माना गया है।

#कौवा#पितर#काकबली
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में मघा नक्षत्र का क्या महत्व है?

मघा पितरों का नक्षत्र है।

#मघा नक्षत्र#पितर#त्रयोदशी
लोक

एकादशी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण दिशा पितरों की दिशा है।

#दक्षिण दिशा#पितर#श्राद्ध विधि
लोक

एकादशी श्राद्ध में नाम गोत्र क्यों बोलते हैं?

पितर की पहचान के लिए।

#नाम गोत्र#संकल्प#पितर
लोक

संकटा देवी पितरों की कैसे सहायता करती हैं?

वे पितरों के संकट दूर करती हैं।

#संकटा देवी#यमपाश#पितर
लोक

दशमी श्राद्ध में काक बलि क्यों?

कौआ पितरों का दूत माना गया है।

#काक बलि#कौआ#पितर
लोक

सोमाय पितृमते स्वाहा क्यों बोलते हैं?

सोम को पितृ तृप्ति हेतु आहुति।

#सोमाय पितृमते#श्राद्ध आहुति#पितर
लोक

दशमी श्राद्ध में सफेद फूल क्यों?

सफेद फूल श्राद्ध में प्रशस्त हैं।

#सफेद फूल#श्राद्ध द्रव्य#पितर
लोक

दशमी श्राद्ध में दक्षिण दिशा क्यों?

दक्षिण पितरों की दिशा है।

#दक्षिण दिशा#यमराज#पितर
लोक

श्राद्ध में वसु रुद्र आदित्य का काम क्या है?

वे श्राद्ध द्रव्य पितरों तक पहुँचाते हैं।

#श्राद्ध देवता#वसु रुद्र आदित्य#पितर
लोक

श्राद्ध में नाम गोत्र क्यों बोलते हैं?

पितर की पहचान के लिए।

#नाम गोत्र#श्राद्ध मंत्र#पितर
लोक

विश्वेदेवों का आवाहन क्यों जरूरी है?

वे श्राद्ध की रक्षा करते हैं।

#विश्वेदेव#श्राद्ध रक्षा#पितर
लोक

अष्टमी श्राद्ध में अन्न का रूप कैसे बदलता है?

अन्न सूक्ष्म ऊर्जा बनकर पहुँचता है।

#अन्न रूपांतरण#श्राद्ध विज्ञान#पितर
लोक

अष्टमी श्राद्ध में पितरों की प्रार्थना कैसी करें?

पितरों की तृप्ति की भावना से भोजन कराएं।

#प्रार्थना#ब्राह्मण भोज#पितर
लोक

श्राद्ध न करने से क्या होता है?

पितर अतृप्त रह सकते हैं।

#श्राद्ध न करना#पितृ दोष#पितर
लोक

अष्टमी श्राद्ध में स्वधा का क्या महत्व है?

स्वधा पितृ अर्पण का मंत्र भाव है।

#स्वधा#पितर#श्राद्ध मंत्र
लोक

अष्टमी श्राद्ध में तिल न हों तो क्या होता है?

तिल के बिना श्राद्ध अपूर्ण माना गया है।

#तिल#श्राद्ध दोष#पितर
लोक

अष्टमी श्राद्ध में कुशा क्यों जरूरी है?

कुशा पितृ कर्म का पवित्र द्रव्य है।

#कुशा#श्राद्ध द्रव्य#पितर
लोक

अष्टमी श्राद्ध में अपराह्न काल क्यों जरूरी है?

अपराह्न पितरों का मुख्य श्राद्ध समय है।

#अपराह्न#श्राद्ध समय#पितर
लोक

अष्टमी श्राद्ध किन पितरों के लिए होता है?

अष्टमी को दिवंगत पितरों के लिए।

#पितर#अष्टमी श्राद्ध#मृत्यु तिथि
लोक

सप्त पितृगण कौन हैं?

बर्हिषद, अग्निष्वात्त, क्रव्याद, आज्यप, सुकलिन, उपहूत और साध्य सप्त पितृगण हैं।

#सप्त पितृगण#गरुड़ पुराण#पितर
लोक

पितृलोक क्या है?

पितरों का पारलौकिक लोक पितृलोक है।

#पितृलोक#पितर#श्राद्ध
लोक

सप्तमी को किसका श्राद्ध करें?

सप्तमी मृत्यु तिथि वाले पितरों का श्राद्ध करें।

#सप्तमी को किसका श्राद्ध#सप्तमी मृत्यु#पितर
लोक

सप्तमी श्राद्ध किसके लिए होता है?

यह सप्तमी तिथि को दिवंगत पितरों के लिए होता है।

#सप्तमी श्राद्ध किसके लिए#मृत्यु तिथि#पितर
लोक

पितृलोक क्या है?

पितरों का पारलौकिक लोक पितृलोक कहलाता है।

#पितृलोक#पितर#श्राद्ध
लोक

तृतीया को किसका श्राद्ध करें?

तृतीया मृत्यु तिथि वाले पितरों का श्राद्ध तृतीया को किया जाता है।

#तृतीया को किसका श्राद्ध#मृत्यु तिथि#पितर
लोक

तृतीया श्राद्ध किसके लिए है?

यह तृतीया तिथि को दिवंगत हुए पितरों के लिए किया जाता है।

#तृतीया श्राद्ध किसके लिए#मृत्यु तिथि#पितर
पितृ पक्ष

पितृ पक्ष में पितर कहाँ से आते हैं?

वायु पुराण के अनुसार पितर चंद्रलोक के माध्यम से दक्षिण दिशा से अपने वंशजों के घर के द्वार पर वायु रूप में उपस्थित होते हैं। 16 दिनों तक वे सम्मान, तर्पण और अन्नादि की प्रतीक्षा करते हैं।

#पितर#चंद्रलोक#वायु पुराण
श्राद्ध दर्शन

सर्प योनि वाले पितर को श्राद्ध कैसे प्राप्त होता है?

सर्प आदि रेंगने वाली योनियों में स्थित पितर को श्राद्ध का अंश 'वायु' बनकर तृप्ति देता है। मंत्र शक्ति से अन्न उनकी योनि के योग्य रूप में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।

#सर्प योनि#वायु#पितर
श्राद्ध दर्शन

पशु योनि वाले पितर को श्राद्ध का अंश क्या बनकर मिलता है?

पशु योनि में स्थित पितर को श्राद्ध का अंश 'तृण' (घास) बनकर मिलता है। पशु अन्न नहीं खा सकते — इसलिए मंत्र शक्ति से अन्न उनके योग्य घास में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।

#पशु योनि#तृण#घास
श्राद्ध दर्शन

असुर योनि में पितर को श्राद्ध कैसे मिलता है?

असुर योनि में स्थित पितर को श्राद्ध का अन्न 'विविध भोगों' के रूप में प्राप्त होता है। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से अन्न उनकी योनि के योग्य रूप में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।

#असुर योनि#विविध भोग#पितर
श्राद्ध दर्शन

देवता बने पितर को श्राद्ध का अन्न किस रूप में मिलता है?

श्रेष्ठ कर्मों से देवत्व प्राप्त पितर को श्राद्ध का अन्न 'अमृत' रूप में मिलता है। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से स्थूल अन्न देव योनि के लिए दिव्य अमृत में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।

#देव योनि#अमृत#पितर
लोक

पितरों का वास कुश के किस भाग में माना जाता है?

पितरों का वास कुश के मूल यानी जड़ भाग में माना जाता है।

#पितर#कुश मूल#तर्पण
लोक

महाभारत के अनुसार पितर वंशजों के कर्मों को कैसे देखते हैं?

महाभारत पितरों को सजीव चेतना मानता है जो वंशजों के धर्म-अधर्म पर दृष्टि रखते हैं।

#महाभारत#पितर#वंशज कर्म
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