ज्योतिष दर्शनग्रह दोष और पितृ दोष में क्या संबंध?पितृ दोष=विशेष ग्रह दोष। सूर्य/चंद्र/9वें पर राहु-केतु-शनि=संकेत। पूर्वजों अतृप्ति=कुंडली ग्रह दोष। उपाय: श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, कौवा/गाय रोटी। पितर तृप्ति=ग्रह दोष कम।#ग्रह दोष#पितृ दोष#संबंध
ज्योतिष दर्शनग्रह दोष पूर्व जन्म के कर्मों का फल है क्या?हाँ — कुंडली=प्रारब्ध कर्म(पूर्व जन्म)। 3 कर्म: संचित/प्रारब्ध(कुंडली)/क्रियमाण(वर्तमान)। वर्तमान कर्म=प्रारब्ध बदल सकता। 'अपना उद्धार स्वयं करो'(गीता)। कुंडली=संकेत, निर्णय नहीं।#ग्रह दोष#पूर्व जन्म#कर्म
ग्रह दोष निवारणराहु महादशा में बटुक भैरव की उपासना कैसे करें?राहु महादशा में कालाष्टमी पर भैरव के सामने दीपक जलाकर 'ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय...' मंत्र जपें। यह राहु दोष में गागर में सागर जैसा प्रभावी है।#राहु महादशा#बटुक भैरव#ग्रह दोष
फलश्रुति और लाभनीलकंठ स्तोत्र से ग्रह दोष दूर होता है क्या?हाँ, नीलकंठ स्तोत्र से सभी ग्रह दोष दूर होते हैं — विशेष रूप से ज्योतिषीय विष दोष (शनि-चंद्र संयोजन) के दुष्प्रभावों को नष्ट करने में यह अत्यंत प्रभावी है।#ग्रह दोष#विष दोष#ज्योतिष
अभिषेक सामग्रीनीलकंठ पूजा में गन्ने का रस क्यों चढ़ाते हैं?नीलकंठ पूजा में गन्ने का रस (इक्षु रस) तांत्रिक बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जा और ग्रह दोषों को दूर करने के लिए चढ़ाया जाता है — इसके बाद जल अवश्य अर्पित करना चाहिए।#गन्ने का रस#इक्षु रस#तांत्रिक बाधा
स्तोत्र में ज्वर और रोग निवारणज्योतिषीय विष दोष क्या होता है?ज्योतिषीय विष दोष शनि और चंद्रमा के संयोजन से उत्पन्न होता है जो मानसिक अशांति और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।#ज्योतिषीय विष दोष#शनि चंद्रमा#मानसिक अशांति
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव की आराधना से क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं?फल — (1) असाध्य रोगमुक्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा, (2) अष्टमेश-मारकेश ग्रह दशा शांति, (3) पितृ दोष-शाप निवारण, (4) संतान-रोजगार (40 सोमवार), (5) कैवल्य मोक्ष — शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं।#शंकुकर्णेश्वर#फलश्रुति#अकाल मृत्यु
स्तोत्र एवं पाठग्रह दोष शांति के लिए कौन से स्तोत्र प्रभावीसूर्य=आदित्य हृदय; चंद्र=शिव; मंगल=हनुमान चालीसा; शनि=हनुमान/शनि स्तोत्र; राहु=दुर्गा; केतु=गणेश। सार्वभौमिक: महामृत्युंजय, नवग्रह स्तोत्र, हनुमान चालीसा।#ग्रह दोष#शांति#स्तोत्र
मंत्र साधनाकिस ग्रह दोष में कौन सा मंत्र सबसे प्रभावी है?ग्रह मंत्र: सूर्य='ॐ ह्रां...' 7K, चन्द्र='ॐ श्रां...' 11K, मंगल='ॐ क्रां...' 10K, बुध='ॐ ब्रां...' 9K, गुरु='ॐ ग्रां...' 19K, शुक्र='ॐ द्रां...' 16K, शनि='ॐ प्रां...' 23K, राहु='ॐ भ्रां...' 18K, केतु='ॐ स्रां...' 17K। गायत्री = सर्वग्रह शांति।#ग्रह दोष#ग्रह मंत्र#बीज मंत्र
ग्रह शांतिशुक्र ग्रह शांति पूजा कैसे करेंशुक्र शान्ति: (1) बीज मंत्र जप (16,000) + हवन (श्वेत चन्दन, तिल)। (2) लक्ष्मी पूजा/श्री सूक्त — अधिदेवता। (3) शुक्रवार व्रत। उपाय: श्वेत वस्तुएँ दान, गाय सेवा, स्त्री सम्मान। रत्न: हीरा/ओपल। शुक्र = सौन्दर्य, विवाह, ऐश्वर्य कारक।#शुक्र#ग्रह दोष#लक्ष्मी
ग्रह शांतिकेतु दोष शांति के लिए कौन सी पूजा करवाएंकेतु शान्ति: (1) केतु बीज मंत्र जप (17,000) + हवन। (2) गणेश पूजा — केतु के देवता। (3) महामृत्युंजय जप। (4) नवग्रह शान्ति। (5) नागबलि पूजा (त्र्यम्बकेश्वर)। उपाय: कुत्ते की सेवा, दूर्वा दान। रत्न: लहसुनिया। ज्योतिषी से कुण्डली दिखाकर करवाएँ।#केतु#ग्रह दोष#शांति पूजा
ग्रह शांतिबुध ग्रह शांति के लिए कौन सी पूजा करवाएंबुध शान्ति: (1) बुध बीज मंत्र जप (9,000/17,000) + हवन (अपामार्ग)। (2) विष्णु सहस्रनाम — बुध के अधिदेवता। (3) नवग्रह पूजा। (4) बुधवार व्रत। उपाय: हरे मूंग/वस्त्र दान, बच्चों को भोजन। रत्न: पन्ना (Emerald)। बुध शुभ-अशुभ दोनों — कुण्डली देखकर करें।#बुध#ग्रह दोष#शांति पूजा
शिव पूजाशिव की पूजा में राहु केतु दोष निवारण कैसे करें?राहु: महामृत्युंजय सवा लाख जप+हवन, शिवलिंग पर काले तिल, काल भैरव पूजा। केतु: कुश से जलाभिषेक, गणेश पूजा, सप्तधान्य अर्पण। दोनों: रुद्राभिषेक, प्रदोष व्रत, 8/9 मुखी रुद्राक्ष, काल सर्प दोष हेतु त्र्यम्बकेश्वर/महाकाल पूजा। ज्योतिषी से कुंडली परामर्श उचित।#राहु केतु#ग्रह दोष#निवारण
ज्योतिष मार्गदर्शनरत्न पहनने से ग्रह दोष पूरी तरह ठीक होता है क्या?नहीं — रत्न सहायक, पूर्ण समाधान नहीं। शुभ ग्रह मजबूत करता, अशुभ पूरा शांत नहीं। सम्पूर्ण=रत्न+मंत्र+दान+सेवा+हवन+कर्म। बिना ज्योतिषी कभी न पहनें।#रत्न#ग्रह दोष#सीमा
ज्योतिष दर्शनग्रह दोष और कर्म दोष में क्या संबंध?ग्रह दोष=कर्म दोष का प्रतिबिंब। कुंडली=कर्मों का नक्शा। ग्रह=डाकिया, कर्म=पत्र — ग्रह कर्मफल पहुँचाते। मंत्र/दान=तीव्रता कम। मूल समाधान=कर्म सुधार। अच्छे कर्म=शुभ ग्रह।#ग्रह दोष#कर्म#संबंध
ज्योतिष उपायग्रह दोष में हवन करने का विशेष लाभ क्या?अग्नि=देवमुख, आहुति सीधे ग्रहों तक। मंत्र+आहुति=दोहरा प्रभाव। वायु शुद्धि(94% बैक्टीरिया)। नवग्रह हवन=9 ग्रह शांत। साढ़ेसाती/कालसर्प/गृहप्रवेश। योग्य पंडित अनिवार्य।#हवन#ग्रह दोष#अग्निहोत्र
शिव पूजाशिव की पूजा से ग्रह दोष निवारण कैसे होता है?शिव = महाकाल, नवग्रह नियंत्रक। शनि: शनि प्रदोष + काले तिल। राहु-केतु: त्र्यंबकेश्वर/नागेश्वर। चंद्र: सोमवार + दूध। सर्व: महामृत्युंजय सवा लाख + रुद्राभिषेक + 'ॐ नमः शिवाय' 108 दैनिक।#ग्रह दोष#निवारण#नवग्रह