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क्या है

पिण्डदान क्या है?(17)

पिण्डदान का अर्थपिण्डदान क्या है?पिण्डदान का महत्व
सरल उत्तर

ब्रह्मलोक गति का फल।

स्रोत प्रश्न: गयाकूप में पिण्डदान का फल क्या है? →
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एकादशी श्राद्ध में रौहिण मुहूर्त क्या है?

कुतुप के बाद का शुभ श्राद्ध समय।

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दशमी श्राद्ध में ऊर्णनाभ क्या है?

पितरों के वस्त्र का प्रतीक धागा।

#ऊर्णनाभ#पितृ वस्त्र#पिण्डदान
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दशमी श्राद्ध में रौहिण मुहूर्त क्या है?

कुतप के बाद का शुभ श्राद्ध समय।

#रौहिण मुहूर्त#पिण्डदान#तर्पण
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गयाकूप में पिण्डदान का फल क्या है?

ब्रह्मलोक गति का फल।

#गयाकूप#पिण्डदान#ब्रह्मलोक
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रौहिण मुहूर्त क्या होता है?

कुतुप के बाद का शुभ श्राद्ध काल।

#रौहिण मुहूर्त#नवमी श्राद्ध#पिण्डदान
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पिण्डज देह क्या है?

पिण्डदान से प्राप्त सूक्ष्म सहायक देह।

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सप्तमी श्राद्ध की विधि क्या है?

सप्तमी श्राद्ध में तर्पण, पिण्डदान, विश्वेदेव स्थापना और ब्राह्मण भोजन होता है।

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पिण्डदान क्या है?

पितरों को पिण्ड अर्पित करना पिण्डदान है।

#पिण्डदान#पिण्ड#श्राद्ध
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पिण्डदान क्या है?

पितरों को पिण्ड अर्पित करने की क्रिया पिण्डदान है।

#पिण्डदान#श्राद्ध#पितृ तृप्ति
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तृतीया श्राद्ध की विधि क्या है?

तृतीया श्राद्ध में संकल्प, तर्पण, पिण्डदान, पंचबलि और ब्राह्मण भोज होता है।

#तृतीया श्राद्ध विधि#तर्पण#पिण्डदान
श्राद्ध विधि

पिण्डदान क्या है?

पिण्डदान श्राद्ध का हृदय है। पके हुए चावल, गाय का दूध, घी, शहद, जौ और काले तिल को मिलाकर गोलाकार तीन पिण्ड बनाए जाते हैं, जो पिता, पितामह और प्रपितामह तीन पीढ़ियों के प्रतीक होते हैं। इन्हें वेदी पर कुशा बिछाकर स्थापित किया जाता है। इसकी शुरुआत भगवान वराह ने की थी।

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श्राद्ध मुहूर्त

रौहिण मुहूर्त किसे कहते हैं?

रौहिण मुहूर्त अपराह्न 12:44 से अपराह्न 01:34 तक का विशेष समय है, जो लगभग 50 मिनट का होता है। यह कुतुप मुहूर्त के ठीक बाद का समय है, जो तर्पण और पिण्डदान की प्रक्रिया के लिए उत्तम है। यह श्राद्ध के तीन मुहूर्तों में दूसरा मुहूर्त है।

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लोक

सपिण्डीकरण क्या है?

सपिण्डीकरण वह संस्कार है जिसमें प्रेत का पिण्ड पितरों के पिण्डों से मिलाकर उसे पितृलोक में स्थान दिया जाता है।

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प्रेत बनने का मुख्य कारण क्या है?

प्रेत बनने के मुख्य कारण हैं: पिण्डदान और श्राद्ध का अभाव, अकाल मृत्यु और महापातक जैसे घोर पाप।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

13-दिनीय यात्रा में परिजनों की भूमिका क्या है?

परिजन विलाप से बचकर पिण्डदान, अन्न-जल, दीपदान, श्राद्ध, दान और सपिण्डीकरण से आत्मा की यात्रा में सहायता करते हैं।

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मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दशगात्र क्या होता है?

दशगात्र मृत्यु के बाद दस दिनों तक होने वाला पिण्डदान है, जिससे पिण्डज शरीर बनता है।

#दशगात्र#पिण्डदान#दस दिन
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डज शरीर क्या होता है?

पिण्डज शरीर पिण्डदान से दस दिनों में बनने वाला प्रेत का पारलौकिक शरीर है।

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