केदारनाथ शिव का पाँचवाँ ज्योतिर्लिंग है। पांडवों ने गोत्र-हत्या से मुक्ति के लिए शिव खोजे — शिव भैंसे रूप में अंतर्धान हुए और उनका 'केदार' (पीठ-भाग) यहाँ स्थापित हुआ। शिव पुराण में यह पापनाशक और मोक्षदायी तीर्थ बताया गया है।
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