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विस्तृत उत्तर
अग्निष्वात्ता ब्राह्मणों के पितर माने गए हैं। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार जिन्होंने लौकिक और वैदिक कर्म किए, किंतु जिनके शरीर को दाह-संस्कार के समय अग्नि ने पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया, वे अग्निष्वात्ता कहलाते हैं। यह पितृ कोटि यज्ञीय और वैदिक कर्मों से संबंधित है।
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