विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार पृथ्वी के नीचे एक के बाद एक सात पाताल स्थित हैं और इनमें से प्रत्येक लोक की ऊंचाई और विस्तार दस-दस हजार योजन है। विष्णु पुराण के द्वितीय अंश, पंचम अध्याय के संस्कृत श्लोक में कहा गया है — दशसाहस्रमेकैकं पातालं मुनिसत्तम — अर्थात हे मुनिश्रेष्ठ, इन पातालों में से प्रत्येक का विस्तार दस-दस हजार योजन है। श्रीमद्भागवत (5.24.7) भी इसकी पुष्टि करता है कि इन सातों निचले लोकों की लंबाई और चौड़ाई ठीक पृथ्वी के ही समान है। इस प्रकार अतल लोक का विस्तार दस हजार योजन (लगभग अस्सी हजार मील) है और यह पृथ्वी से दस हजार योजन नीचे स्थित है।
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