विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णु पुराण में इन सात अधोलोकों को सामूहिक रूप से बिल-स्वर्ग या भूमिगत स्वर्ग (Subterranean Heavens) की संज्ञा दी गई है। बिल का अर्थ है भूमि के नीचे की गुफा या बिल और स्वर्ग का अर्थ है आनंदमय धाम। इस प्रकार बिल-स्वर्ग का अर्थ है भूमि के नीचे स्थित स्वर्ग के समान आनंदमय स्थान। इन लोकों को यह संज्ञा इसलिए दी गई क्योंकि यहाँ के निवासियों का जीवन देवराज इंद्र के स्वर्गलोक से भी अधिक सुखमय, समृद्ध और विलासितापूर्ण बताया गया है। यहाँ रहने वाले प्राणी असीमित भौतिक आनंद का उपभोग करते हैं परंतु उनमें आध्यात्मिक चेतना और आत्मज्ञान का नितांत अभाव होता है। नरक लोक ब्रह्मांड का वह स्थान है जहाँ पापी जीवात्माएं यातनाएं पाती हैं जो इन पातालों से भी नीचे स्थित है।
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