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विस्तृत उत्तर
जो मनुष्य अपना संपूर्ण जीवन घोर अनैतिकता, व्यसनों और पर-स्त्री गमन में व्यतीत करते हैं, और जिनकी मृत्यु मानसिक विक्षिप्तता या घोर उन्माद की अवस्था में होती है, उनका सूक्ष्म शरीर पिशाच योनि में परिवर्तित हो जाता है। पिशाच योनि प्रेत से भी अधिक मलिन, तामसिक और हिंसक मानी जाती है। यह अवस्था उस जीवन का परिणाम है जिसमें धर्म, संयम और शुद्ध बुद्धि पूरी तरह नष्ट हो जाती है और जीव नकारात्मक, विक्षिप्त तथा तामसिक संस्कारों से भर जाता है।
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