विस्तृत उत्तर
बल असुर की 96 मायाओं का दार्शनिक महत्व अत्यंत गहरा है। ये 96 मायाएं केवल जादुई शक्तियाँ नहीं हैं बल्कि ये उन समस्त भ्रमों और इंद्रिय-सुखों का प्रतीक हैं जो जीव को आत्मज्ञान से दूर रखते हैं। देवी भागवत पुराण पुष्टि करता है कि कोई भी अन्य मायावी बल की सभी छियानवे मायाओं को नहीं जान सकता। यह दर्शाता है कि माया की गहराई अथाह है — मनुष्य अपने जीवन में इसकी एक या दो परतें ही समझ पाता है। भागवत पुराण कहता है कि आज भी पृथ्वी पर कुछ परम मायावी लोग इन मायाओं में से एक या दो को धारण करते हैं। यह इस बात का संकेत है कि माया का प्रभाव केवल अतल लोक तक सीमित नहीं है — यह पृथ्वी पर भी व्याप्त है। अतल लोक का बल असुर इस सार्वभौमिक माया का केंद्र-बिंदु है।
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