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विस्तृत उत्तर
भगवान शिव ने त्रिपुर को एक ही बाण से जलाया। एक हजार वर्ष पूर्ण होने पर जब विशेष मुहूर्त आया और पुष्य नक्षत्र में तीनों नगर एक रेखा में संरेखित हुए, तब भगवान शिव ने अपने धनुष की प्रत्यंचा खींची और भयंकर बाण छोड़ दिया। उस एक बाण ने तीनों मायावी नगरों को एक ही पल में भस्म कर दिया। इसके बाद भगवान शिव त्रिपुरारी, यानी त्रिपुर के शत्रु, के नाम से प्रसिद्ध हुए।
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