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विस्तृत उत्तर
भगवान वामन ने रावण को अपने वाम चरण के अंगूठे की हल्की ठोकर से योजनायुतायुतं, अर्थात एक करोड़ योजन या लगभग अस्सी हजार मील से भी अधिक दूर फेंक दिया। रावण सुतल लोक के द्वार से उछलकर सीधे अपनी लंका में जा गिरा। यह घटना तब हुई जब रावण दिग्विजय के अहंकार में महाराजा बलि को चुनौती देने सुतल लोक पहुँचा और भगवान वामन को साधारण बौना द्वारपाल समझकर प्रवेश का प्रयास करने लगा।
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