विस्तृत उत्तर
भगवान वामन ने त्रिविक्रम रूप तब धारण किया जब महाराजा बलि ने जल छोड़कर तीन पग भूमि दान का संकल्प ले लिया। जैसे ही बलि ने दान का संकल्प लिया, भगवान वामन ने अपना अत्यंत अद्भुत और अकल्पनीय त्रिविक्रम रूप धारण किया। इस रूप में भगवान ने अपने पहले ही पग में संपूर्ण पृथ्वी और सभी अधोलोकों को नाप लिया, और अपने दूसरे पग में संपूर्ण ऊर्ध्व लोकों, अर्थात स्वर्ग से लेकर महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक तक, को नाप लिया। भगवान का दूसरा पग ब्रह्मांड के ऊपरी आवरण को पार कर गया, जहाँ सत्यलोक में ब्रह्मा जी ने अपने कमंडलु के जल से उनके चरण का प्रक्षालन किया, जिससे परम पावन गंगा, विष्णुपदी, का प्राकट्य हुआ। तीसरे पग के लिए ब्रह्मांड में कोई स्थान शेष नहीं रहा, तब बलि ने अपना सिर भगवान को अर्पित किया।
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