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विस्तृत उत्तर
रुग्ण, अर्थात बीमार अवस्था में किए गए दान का फल 100 गुना बताया गया है। दान को आत्मा की पारलौकिक यात्रा में सहायक माना गया है। यदि व्यक्ति स्वस्थ अवस्था में स्वयं अपने हाथों से दान करे तो उसका फल 1000 गुना होता है। यदि वह बीमारी की अवस्था में दान करे तो उसका फल 100 गुना माना गया है। मृत्यु के बाद पुत्र द्वारा किए गए दान का फल सामान्य प्रभाव वाला बताया गया है।
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