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विस्तृत उत्तर
ब्रह्मांड पुराण और वायु पुराण में रसातल को स्पष्ट रूप से छठा लोक माना गया है। वायु पुराण के अनुसार रसातल की मिट्टी कंकड़-पत्थर वाली या पथरीली है। इन पुराणों में रसातल की भूमि पथरीली बताई गई है और इसके निवासियों में कालेय, पणि और असुरों का उल्लेख मिलता है। वायु पुराण के कुछ वर्णनों में रसातल के कुछ भागों पर प्रह्लाद का अधिकार भी बताया गया है। यह वर्णन कल्प भेद के कारण विविध रूपों में मिलता है।
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