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विस्तृत उत्तर
देव पितर सृष्टि के आरंभिक, अयोनिज और नित्य पितर हैं। उनका कार्य ब्रह्मांडीय संतुलन बनाए रखना और जीवों के कर्मों के अनुसार न्याय में सहायक होना है। अर्यमा देव पितरों के अधिपति माने गए हैं। मनुष्य पितर वे जीवात्माएँ हैं जो मनुष्य जन्म के बाद मृत्यु को प्राप्त होकर पितृलोक में अपने पुण्य और कर्म के अनुसार निवास करती हैं। वंशजों द्वारा श्राद्ध और तर्पण इन्हीं मनुष्य पितरों की तृप्ति के लिए किया जाता है।
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