विस्तृत उत्तर
धुन्धुकारी जीवन भर महापापी, दुराचारी, हिंसक और चोर रहा। उसने अपने माता-पिता को प्रताड़ित किया, जिसके कारण आत्मदेव वन चले गए और धुन्धुली ने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली। धुन्धुकारी पांच वेश्याओं के साथ रहने लगा और उनके लिए चोरी करने लगा। जब वेश्याओं को लगा कि धुन्धुकारी के कारण वे पकड़ी जाएंगी, तो उन्होंने उसे रस्सियों से बांधकर और उसके मुख में जलते हुए अंगारे डालकर अत्यंत क्रूरतापूर्वक मार डाला। जीवन भर किए गए घोर पापों और अत्यंत हिंसक अकाल मृत्यु के कारण धुन्धुकारी एक भयंकर प्रेत बन गया। वह प्रचंड वायु-बवंडर के रूप में भटकता था, भूख-प्यास से तड़पता था परंतु कुछ खा-पी नहीं सकता था।
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