विस्तृत उत्तर
अतल लोक में प्रविष्ट हुए पुरुषों को सम्मोहित करने के लिए वहाँ की स्त्रियाँ एकांत में ले जाकर एक विशेष प्रकार का मादक रस पीने को देती हैं। शास्त्रों में इस रस को हाटक रस कहा गया है। यद्यपि वितल लोक में हाटकी नामक नदी बहती है जो भगवान शिव और भवानी के तेज से उत्पन्न है और वहाँ हाटकेश्वर शिव का वास है, परंतु अतल लोक की स्त्रियाँ जिस मादक तरल का उपयोग करती हैं वह कामोद्दीपक हाटक रस कहलाता है। इस रस का प्रभाव इतना तीव्र और मायावी होता है कि इसे पीने के उपरांत वह पुरुष स्वयं को ईश्वर समझने लगता है।
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