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विस्तृत उत्तर
संस्कृत व्युत्पत्ति के अनुसार 'जन' शब्द का तात्पर्य उत्पत्ति, प्रजा या उन सृजनकर्ता सत्ताओं से है जो परब्रह्म के संकल्प से प्रकट हुई हैं। इसी कारण इस लोक को जनलोक कहा गया है। यह उन प्रजापतियों, ब्रह्मा के मानस पुत्रों और महान नैष्ठिक ब्रह्मचारियों का मूल और शाश्वत निवास स्थान है, जो ब्रह्मांड के सुचारू संचालन, आध्यात्मिक ज्ञान के संरक्षण और प्रलय के पश्चात नई सृष्टि के बीजारोपण में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
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