📖
विस्तृत उत्तर
नैमित्तिक प्रलय के समय जब महर्लोक रहने योग्य नहीं रह जाता, तब वहाँ के प्रजापति, ऋषि और मुनि जनलोक में आश्रय लेते हैं। ब्रह्मा की पूरी रात्रि के दौरान जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक सुरक्षित रहते हैं। जब ब्रह्मा की रात्रि समाप्त होती है और नया कल्प शुरू होता है, तब जनलोक में शरण लिए हुए यही ऋषि और प्रजापति पुनः नीचे आकर नई सृष्टि के निर्माण और विस्तार में ब्रह्मा जी की सहायता करते हैं।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





