विस्तृत उत्तर
काली तंत्र साधना का वर्णन शक्ति संगम तंत्र और कुलार्णव तंत्र में विस्तार से है:
काली — दस महाविद्याओं में प्रथम
तंत्र शास्त्र में दस महाविद्याएं हैं — काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला। काली = प्रथम और सर्वश्रेष्ठ।
काली का स्वरूप
काले वर्ण, चार भुजाएं, खड्ग और कटा सिर, दो हाथों में — भक्तों को वर और अभय। रक्त जिह्वा, मुंडमाला। तारा का स्वभाव उग्र — किंतु भक्तों पर करुणामयी।
काली तंत्र साधना का उद्देश्य
- 1महाकाली उपासना — परम शक्ति से एकता
- 2मृत्यु-भय निवारण — काली = काल की स्वामिनी
- 3शत्रु विनाश — रक्षा
- 4मोक्ष — काली = महाकाल — समस्त भय से मुक्ति
काली साधना की विशेषता
शक्ति संगम तंत्र: काली साधना में निर्भयता अनिवार्य। काली भय का प्रतिनिधित्व करती हैं — जो उनसे नहीं डरता, वह सब भय से मुक्त।
मुख्य मंत्र
ॐ क्रीं काल्यै नमः' — नवार्ण मंत्र: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
साधना काल: अमावस्या की रात्रि — सर्वश्रेष्ठ।





