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विस्तृत उत्तर
कपिल मुनि ने सगर पुत्रों को अपने नेत्रों से उत्पन्न प्रलयंकारी अग्नि से भस्म किया। सगर पुत्रों ने महातल में कपिल मुनि को चोर समझकर अपशब्द कहे और उन पर अस्त्र-शस्त्रों से प्रहार करने के लिए दौड़े। उनके कोलाहल और हिंसक कृत्य से कपिल मुनि की योग समाधि टूट गई। जैसे ही कपिल मुनि ने क्रोध में अपने नेत्र खोले, उनके नेत्रों से प्रलयंकारी अग्नि उत्पन्न हुई, जिसने क्षण भर में सगर के साठ हजार पुत्रों को भस्म कर दिया।
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