हवन विधिबुद्धि और मेधा के लिए हवन में कौन सा मंत्र जपते हैं?बुद्धि-मेधा के लिए मंत्र: 'ॐ यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते। तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा॥' अर्थ: हे अग्निदेव! जिस मेधा की देवगण और पितर उपासना करते हैं, उसी से मुझे मेधावी (बुद्धिमान) बनाएं।#मेधा मंत्र#बुद्धि मेधा हवन#देवगण पितर
हवन विधिहवन में महामृत्युंजय मंत्र की आहुति क्यों देते हैं?महामृत्युंजय मंत्र की आहुति: कम से कम 11 या 21 बार। 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् स्वाहा।' फल: बुद्धि का परिष्कार और दीर्घायु की प्राप्ति।#महामृत्युंजय मंत्र आहुति#दीर्घायु#बुद्धि परिष्कार
हवन विधिहवन में गायत्री मंत्र की आहुति कितनी बार देते हैं?हवन में गायत्री मंत्र की आहुति: कम से कम 11 या 21 बार। मंत्र: 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात स्वाहा।' फल: बुद्धि का परिष्कार और दीर्घायु की प्राप्ति।#गायत्री मंत्र आहुति#11 21 बार#बुद्धि परिष्कार
हवन विधिसायं हवन के मंत्र कौन से हैं?सायं हवन के मंत्र: 1. 'ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निः स्वाहा', 2. 'ॐ अग्निर्वर्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा', 3. 'ॐ अग्निर्ज्योतिर्ज्योतिरग्निः स्वाहा' (मौन), 4. 'ॐ सजूर्देवेन सवित्र सजू रात्र्येन्द्रवत्या। जुषाणो अग्निर्वेतु स्वाहा।'#सायं हवन मंत्र#अग्नि ज्योति#रात्रि
हवन विधिप्रातः हवन के मंत्र कौन से हैं?प्रातः हवन के मंत्र: 1. 'ॐ सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः स्वाहा', 2. 'ॐ सूर्यो वर्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा', 3. 'ॐ ज्योतिः सूर्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा' (मौन), 4. 'ॐ सजूर्देवेन सवित्रा...' (उषाकाल में सूर्य आहुति ग्रहण करें)।#प्रातः हवन मंत्र#सूर्य ज्योति#उषाकाल
हवन विधिव्याहृति के चार मंत्रों का क्या अर्थ है?4 व्याहृति मंत्रों का अर्थ: 1=पृथ्वी लोक और प्राण वायु के लिए, 2=अंतरिक्ष और अपान वायु के लिए, 3=द्युलोक और व्यान वायु के लिए, 4=समस्त लोकों और तीनों वायुओं की समेकित आहुति। हर अंत में 'इदन्न मम'।#व्याहृति मंत्र अर्थ#प्राण अपान व्यान#पृथ्वी अंतरिक्ष द्युलोक
हवन विधिअग्नि स्थापन मंत्र क्या है?अग्नि स्थापन मंत्र: 'ॐ भूर्भुवः स्वर्द्यौरिव भूम्ना पृथिवीव वरिम्णा। तस्यास्ते पृथिवि देवयजनि पृष्ठेऽग्निमन्नादमन्नाद्यायादधे॥' अर्थ: हे देवयजनि पृथ्वी! तेरे पृष्ठ भाग पर अग्निदेव को अन्न-प्राप्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए स्थापित करता हूँ।#अग्नि स्थापन मंत्र#देवयजनि#अन्नाद
हवन विधिअग्नि प्रज्ज्वलन का मंत्र क्या है?अग्नि प्रज्ज्वलन मंत्र: 'ॐ भूर्भुवः स्वः' बोलते हुए दीपक से अग्नि जलाएं। अग्नि स्थापित होने पर प्रणाम मुद्रा में: 'ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रतिजागृहि...' से अग्निदेव की स्तुति करें।#अग्नि प्रज्ज्वलन मंत्र#भूर्भुवः स्वः#दीपक
हवन विधिहिरण्यगर्भ सूक्त मंत्र का क्या अर्थ है?हिरण्यगर्भ सूक्त का अर्थ: जो स्वप्रकाशस्वरूप, सृष्टि के पूर्व भी विद्यमान, सम्पूर्ण जगत का एकमात्र स्वामी और पृथ्वी से द्युलोक तक को धारण करने वाले हैं — उस सुखस्वरूप परमात्मा की हविष्य (प्रेम और भक्ति) से उपासना करें।#हिरण्यगर्भ सूक्त#मंत्र अर्थ#परमात्मा
हवन विधि'ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि...' मंत्र का क्या अर्थ है?'ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव। यद् भद्रं तन्न आ सुव॥' अर्थ: हे सकल जगत के उत्पत्तिकर्ता परमेश्वर! हमारे सम्पूर्ण दुर्गुण, दुर्व्यसन और दुःख दूर करें। जो कल्याणकारक गुण, कर्म और पदार्थ हैं, वे सब हमें प्राप्त कराएं।#विश्वानि देव सवितर्#यजुर्वेद मंत्र अर्थ#दुर्गुण नाश
हवन विधिहवन में ईश्वर स्तुति के लिए कौन से मंत्र पढ़ते हैं?ईश्वर स्तुति: ऋग्वेद और यजुर्वेद से 8 मंत्रों का विधान। प्रमुख: 1. यजुर्वेद (30.3): 'ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव...' 2. हिरण्यगर्भ सूक्त: 'हिरण्यगर्भः समवर्त्तताग्रे...' इनके सस्वर पाठ से वातावरण पूर्णतः सात्विक होता है।#ईश्वर स्तुति मंत्र#यजुर्वेद 30.3#हिरण्यगर्भ सूक्त
हवन विधिअंगस्पर्श में कौन से अंग छूते हैं?अंगस्पर्श के अंग: मुख (सत्य वाणी), नासिका (प्राणशक्ति), नेत्र (शुभ दृष्टि), कान (कल्याणकारी श्रवण), भुजाएं (सत्कर्म बल), जंघाएं (ओज-स्थिरता), फिर पूरे शरीर पर जल छिड़कना (रोगरहित-शक्तिसंपन्न)।#अंगस्पर्श अंग#मुख नासिका नेत्र#कान भुजाएं जंघाएं
हवन विधितीन आचमन मंत्रों का क्या अर्थ है?तीन आचमन मंत्रों का अर्थ: 1. 'ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा' = परमात्मा मेरे आधार, जल अंतःकरण को शुद्ध करे। 2. 'ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा' = प्रभो! आप मेरे रक्षक हैं। 3. 'ॐ सत्यं यशः श्रीर्मयि...' = मुझमें सत्य, यश और लक्ष्मी सदैव निवास करें।#आचमन मंत्र अर्थ#अमृतोपस्तरण#सत्यं यशः