विस्तृत उत्तर
घी के सागर के पार क्रौंच द्वीप है जो दूध (क्षीर) के सागर से घिरा है। इसका नाम क्रौंच पर्वत के नाम पर है। यहाँ के शासक घृतपृष्ठ थे। यहाँ शुक्ल, वर्धमान, भोजन, उपबर्हिण, नन्द, नंदन और सर्वतोभद्र नामक सात पर्वत हैं। यहाँ के निवासी पुरुष, ऋषभ, द्रविण और देवक कहलाते हैं। ये वरुण देव (जल के देवता) की उपासना करते हैं। भागवत पुराण के अनुसार यहाँ के निवासी जल के अधिष्ठाता देवता भगवान वरुण के चरणकमलों में अंजलि भरकर जल अर्पित करते हुए परब्रह्म की उपासना करते हैं। इन सभी द्वीपों में रहने वाले लोग पूर्णतः स्वर्गिक जीवन व्यतीत करते हैं जहाँ बुढ़ापा, रोग और मानसिक कष्ट नहीं होते।
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