विस्तृत उत्तर
सुतल लोक की विशेषता यह बताई गई है कि साक्षात् भगवान नारायण अपने चतुर्भुज रूप में हाथ में गदा धारण किए हुए इस लोक के द्वार पर रक्षक के रूप में अहर्निश खड़े हैं। भगवान वामन महाराजा बलि के सर्वस्व त्याग, सत्यनिष्ठा और अनन्य भक्ति से इतने वशीभूत हुए कि उन्होंने बलि को स्वयं उनके रक्षक और नित्य द्वारपाल बनने का वरदान दिया। भागवत में यह भी कहा गया है कि प्रह्लाद और बलि सुतल लोक में नित्य भगवान के दर्शन करेंगे। लक्ष्मी जी और रक्षाबंधन से जुड़े प्रसंग में यह भी आता है कि भगवान विष्णु वैकुंठ लौटे, पर उन्होंने वचन दिया कि वे सूक्ष्म रूप से सदैव सुतल लोक की रक्षा करेंगे और वर्ष में एक बार अपने भक्त बलि से मिलने अवश्य आएंगे।
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