विस्तृत उत्तर
जप में दीपक के महत्व का वर्णन आगम शास्त्र और धर्म सिंधु में मिलता है:
दीपक जलाना क्यों उचित
1देवता की उपस्थिति
स्कंद पुराण: 'जहाँ दीपक जलता है, वहाँ देवता विराजते हैं।' जप में जब देवता का आवाहन होता है — दीपक की ज्योति उनकी उपस्थिति का चिह्न है।
2ध्यान में सहायक
दीपक की लौ — त्राटक (एकाग्रता) के लिए। जप करते समय आँखें खुली हों तो दीपक पर दृष्टि → ध्यान केंद्रित।
3सात्विक वातावरण
घी का दीपक जलाने से वातावरण सात्विक होता है — जप की ऊर्जा बढ़ती है।
4अग्नि तत्व
जप में मंत्र (वायु/नाद) + दीपक (अग्नि) = दोनों तत्वों का एकत्र प्रयोग।
तंत्र साधना में
तंत्र शास्त्र — रात्रि जप में दीपक अनिवार्य है। दीपक की दिशा — पूर्व या उत्तर।
यदि दीपक न हो
धर्म सिंधु — दीपक के बिना भी जप पूर्ण है। दीपक सहायक है, अनिवार्य नहीं। जप की शक्ति श्रद्धा और एकाग्रता में है।
व्यावहारिक
घी का दीपक + अगरबत्ती + शांत स्थान — जप के लिए आदर्श वातावरण।





