विस्तृत उत्तर
स्वायम्भुव मनु के पुत्र और विश्वकर्मा की पुत्री बर्हिष्मती के पति महाराज प्रियव्रत ने इस भू-मण्डल पर ग्यारह करोड़ (110 मिलियन) वर्षों तक अत्यंत प्रताप और धर्म के साथ शासन किया। उनके और बर्हिष्मती के कुल दस पुत्र थे जिनके नाम साक्षात् अग्नि के समान तेजस्वी थे — आग्नीध्र, इध्मजिह्व, यज्ञबाहु, महावीर, हिरण्यरेता, घृतपृष्ठ, सवन, मेधातिथि, वीतिहोत्र और कवि। इन दस पुत्रों में से तीन पुत्र — कवि, महावीर और सवन — बाल्यकाल से ही नैष्ठिक ब्रह्मचारी थे और उन्होंने पारमहंस्य आश्रम स्वीकार कर लिया था। शेष सात पुत्रों को महाराज प्रियव्रत ने सात महाद्वीपों का अधिपति नियुक्त कर सम्पूर्ण भूमण्डल का प्रशासन उन्हें सौंप दिया। महाराज प्रियव्रत के रथ के पहियों से ही सात महासागर और सप्तद्वीप अस्तित्व में आए।
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