विस्तृत उत्तर
महर्लोक के वातावरण में लौकिक सूर्य, चन्द्रमा या तारों के प्रकाश की कोई आवश्यकता नहीं होती क्योंकि ध्रुवलोक के ऊपर भौतिक सूर्य की किरणों का उस रूप में प्रभाव नहीं होता। शास्त्रों और वैदिक संहिताओं के अनुसार ऊर्ध्व लोकों में ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत वहां निवास करने वाले सिद्ध योगियों, प्रजापतियों और महर्षियों का अपना आन्तरिक तपोबल (Inner Light) और साक्षात् दैवीय प्रकाश है। इस प्रकार महर्लोक भौतिक सूर्य की अग्नि से नहीं अपितु योग और तप की अतीन्द्रिय आन्तरिक अग्नि से प्रकाशित होता है। यह इस लोक की सबसे विशेष और अलौकिक विशेषता है जो इसे त्रैलोक्य से पूर्णतः अलग करती है।
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