विस्तृत उत्तर
महातल लोक में जन्म जीवात्मा के कर्म और चेतना के स्तर के अनुसार मिलता है। सनातन दर्शन के अनुसार कोई भी जीवात्मा किसी विशिष्ट लोक में अपने संचित, प्रारब्ध और क्रियमाण कर्मों तथा चेतना के स्तर के अनुसार जन्म लेती है। महातल में वे जीव जन्म लेते हैं जिन्होंने पृथ्वी पर रहते हुए घोर तपस्या, अपार भौतिक दान-पुण्य, बड़े-बड़े यज्ञ और भारी भौतिक उपलब्धियाँ प्राप्त की हों, पर जिनमें आध्यात्मिक चेतना, वैराग्य और ईश्वर भक्ति का पूर्ण अभाव रहा हो। जिन जीवों में अत्यधिक भौतिक लालसा, अहंकार, धन और सत्ता का लोभ, क्रोध, ईर्ष्या और आक्रामक स्वभाव होता है, वे अपने असीम पुण्यों और उग्र स्वभाव के मिश्रित परिणाम से महातल जैसे लोकों में शक्तिशाली नागों या दैत्यों के रूप में जन्म लेते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





