विस्तृत उत्तर
कालिय नाग महातल के प्रमुख नागों में से एक है, जिसका प्रसंग श्रीमद्भागवत पुराण के दसवें स्कंध में प्रसिद्ध है। कालिय मूल रूप से रमणक द्वीप का निवासी था, लेकिन गरुड़ के प्रहारों से भयभीत होकर वह पृथ्वी पर वृंदावन के समीप यमुना नदी के कालिय दह में आकर छिप गया। उसके विष से यमुना का जल उबलने लगा और आसपास के जीव, पक्षी और वृक्ष नष्ट हो गए। भगवान श्रीकृष्ण ने कालिय नाग का दमन किया, उसके फनों पर दिव्य नृत्य किया और उसे यमुना छोड़कर सपरिवार महातल लौटने का आदेश दिया।
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