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विस्तृत उत्तर
मनुष्य पितर वे पूर्वज हैं जिन्होंने मनुष्य योनि में जन्म लेकर मृत्यु के बाद पितृलोक में अपने कर्म और पुण्य के अनुसार स्थान पाया है। वे अपने वंशजों से जुड़े रहते हैं और तर्पण, पिण्डदान तथा श्राद्ध से तृप्त होते हैं। श्राद्ध इसलिए किया जाता है कि उन्हें पारलौकिक पोषण, बल और शांति प्राप्त हो तथा वे प्रसन्न होकर वंशजों को आयु, संतान, धन, विद्या और सुख का आशीर्वाद दें।
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