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विस्तृत उत्तर
माता लक्ष्मी ने राजा बलि से भगवान विष्णु को मुक्त करने का वर मांगा। जब बलि ने राखी बांधने वाली ब्राह्मणी से कोई भी उपहार मांगने को कहा, तब माता लक्ष्मी ने अवसर देखकर कहा कि यदि आप वास्तव में मुझे अपनी बहन मानते हैं और उपहार देना चाहते हैं, तो मेरे पति को मुक्त कर दीजिए, जो दिन-रात आपके महल के द्वारपाल के रूप में पहरा दे रहे हैं। यह सुनकर महाराजा बलि आश्चर्यचकित रह गए। तब माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु ने उन्हें अपने वास्तविक दिव्य स्वरूपों के दर्शन कराए।
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