विस्तृत उत्तर
भगवान को सोने का मुकुट (किरीट) चढ़ाना सर्वोच्च भक्ति और सम्मान का प्रतीक है:
- 1स्वर्ण = सूर्य/दिव्यता: सोना = सूर्य धातु, अविनाशी, शुद्धतम। भगवान = अविनाशी — सोना उनकी दिव्यता का प्रतीक।
- 1किरीट = सर्वोच्च: मुकुट = राजा का सर्वोच्च चिह्न। भगवान को मुकुट = 'आप राजाधिराज (राजाओं के राजा) हैं' — सर्वोच्च सम्मान।
- 1विष्णु-किरीट: भगवान विष्णु की चतुर्भुज मूर्ति में किरीट (मुकुट) अनिवार्य अलंकार है। शंख-चक्र-गदा-पद्म + किरीट-कुण्डल-वनमाला = विष्णु स्वरूप।
- 1भक्त का समर्पण: सोना = सर्वाधिक मूल्यवान धातु। सोने का मुकुट अर्पित करना = 'मेरा सबसे मूल्यवान आपको समर्पित' = परम त्याग।
- 1मंदिर सेवा: स्वर्ण मुकुट = मंदिर की सम्पत्ति और गौरव। भक्तों को दर्शन में दिव्य अनुभव।
विधि: शुभ मुहूर्त/तिथि → मुकुट को गंगाजल-पंचामृत से शुद्ध → मंत्रोच्चार सहित देवता के मस्तक पर स्थापन → आरती → दान पत्र में दानकर्ता का नाम अंकित।
विशेष: सोने का मुकुट चढ़ाना सर्वोच्च दान है किन्तु भगवान को सोने की नहीं, भक्ति की आवश्यकता है। एक तुलसी पत्र भी श्रद्धा से चढ़ाना सोने के मुकुट से कम नहीं।





