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मंदिर रहस्य📜 विष्णु पुराण, आगम शास्त्र, शिल्प शास्त्र1 मिनट पठन

मंदिर में चांदी का छत्र चढ़ाने का क्या महत्व है?

संक्षिप्त उत्तर

छत्र: राजसी सम्मान (भगवान = ब्रह्माण्ड राजा), रक्षा प्रतीक, चाँदी = चन्द्र (शीतलता), वामन अवतार सम्बंध। 'छत्रदानात् सुखं लोके' = इहलोक+परलोक सुख। अत्यंत पुण्यदायी दान।

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विस्तृत उत्तर

मंदिर में भगवान को चाँदी/स्वर्ण का छत्र (छाता) चढ़ाना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है:

  1. 1राजसी सम्मान: छत्र = राजा का प्रतीक चिह्न। भगवान = सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के राजा। छत्र अर्पित करना = भगवान को सर्वोच्च राजा मानकर सम्मान।
  1. 1रक्षा प्रतीक: छत्र = सूर्य ताप, वर्षा, विपत्ति से रक्षा। भगवान को छत्र = भक्त की प्रार्थना 'आप मेरी रक्षा करें, मैं आपकी सेवा करता हूँ।'
  1. 1चाँदी = चन्द्र धातु: चाँदी चन्द्र ग्रह से सम्बद्ध = शीतलता, शांति, सौम्यता। चाँदी का छत्र = देवता को शीतलता प्रदान।
  1. 1वामन अवतार सम्बंध: भगवान वामन ने छत्र-दण्ड धारण किया था। छत्र दान = वामन भगवान की कृपा (विशेषतः वामन द्वादशी पर)।
  1. 1पुण्य फल: शास्त्रों में छत्रदान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है — 'छत्रदानात् सुखं लोके छायादानात् परत्र च' (छत्र दान से इस लोक में सुख और छाया दान से परलोक में सुख)।
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शास्त्रीय स्रोत
विष्णु पुराण, आगम शास्त्र, शिल्प शास्त्र
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