विस्तृत उत्तर
मंदिर में भगवान को चाँदी/स्वर्ण का छत्र (छाता) चढ़ाना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है:
- 1राजसी सम्मान: छत्र = राजा का प्रतीक चिह्न। भगवान = सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के राजा। छत्र अर्पित करना = भगवान को सर्वोच्च राजा मानकर सम्मान।
- 1रक्षा प्रतीक: छत्र = सूर्य ताप, वर्षा, विपत्ति से रक्षा। भगवान को छत्र = भक्त की प्रार्थना 'आप मेरी रक्षा करें, मैं आपकी सेवा करता हूँ।'
- 1चाँदी = चन्द्र धातु: चाँदी चन्द्र ग्रह से सम्बद्ध = शीतलता, शांति, सौम्यता। चाँदी का छत्र = देवता को शीतलता प्रदान।
- 1वामन अवतार सम्बंध: भगवान वामन ने छत्र-दण्ड धारण किया था। छत्र दान = वामन भगवान की कृपा (विशेषतः वामन द्वादशी पर)।
- 1पुण्य फल: शास्त्रों में छत्रदान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है — 'छत्रदानात् सुखं लोके छायादानात् परत्र च' (छत्र दान से इस लोक में सुख और छाया दान से परलोक में सुख)।





