विस्तृत उत्तर
विदेशी पर्यटकों/गैर-हिन्दुओं के मंदिर प्रवेश के विषय में कोई एकल सार्वभौमिक नियम नहीं है — यह मंदिर-विशिष्ट है।
मंदिर-अनुसार नीतियाँ
1सभी के लिए खुले (अधिकांश मंदिर)
भारत के अधिकांश मंदिर सभी — भारतीय/विदेशी, हिन्दू/गैर-हिन्दू — के लिए खुले हैं। उदाहरण: अक्षरधाम (दिल्ली), ISKCON (सभी), बिरला मंदिर, कई बड़े शिव मंदिर।
2केवल हिन्दुओं के लिए (कुछ प्रमुख मंदिर)
- ▸जगन्नाथ पुरी: केवल हिन्दू — गैर-हिन्दू प्रवेश वर्जित (सदियों पुराना नियम)
- ▸गुरुवायुर (केरल): केवल हिन्दू
- ▸पद्मनाभस्वामी (तिरुवनन्तपुरम): केवल हिन्दू
- ▸कुछ दक्षिण भारतीय मंदिर: गर्भगृह प्रवेश सीमित
3शर्तों सहित (मध्य मार्ग)
- ▸तिरुपति: सभी — परंतु हिन्दू होने की घोषणा (Declaration Form)
- ▸मीनाक्षी मंदिर: सभी — शालीन वस्त्र अनिवार्य
- ▸कुछ मंदिर: बाहरी परिसर = सभी, गर्भगृह = केवल हिन्दू
विदेशी पर्यटकों के लिए सामान्य नियम
- ▸मंदिर-विशिष्ट नियम पहले जानें (वेबसाइट/गाइड)
- ▸शालीन वस्त्र (कन्धे/घुटने ढके)
- ▸जूते बाहर
- ▸फोटोग्राफी — पूछकर
- ▸आचरण = सम्मानपूर्ण
- ▸शोर/हँसी-मजाक = अनुचित
- ▸पवित्र वस्तुओं को बिना अनुमति न छुएँ
ISKCON/नव-हिन्दू मंदिर
ISKCON जैसे संगठन विदेशियों/गैर-हिन्दुओं का विशेष स्वागत करते हैं — भक्ति में कोई भेद नहीं।
कानूनी दृष्टि
भारतीय संविधान अनुच्छेद 25-26: धार्मिक स्वतंत्रता + धार्मिक संस्थानों को अपने नियम बनाने का अधिकार। अतः कुछ मंदिरों का गैर-हिन्दू प्रतिबंध = कानूनी (धार्मिक स्वायत्तता)।
आध्यात्मिक दृष्टि
भगवान सबके हैं — जाति, धर्म, देश का भेद नहीं। परंतु मंदिर-विशिष्ट परम्पराओं/नियमों का सम्मान = अतिथि का कर्तव्य।





