विस्तृत उत्तर
मंदिर में अविवाहित युवक-युवती के एक साथ दर्शन/पूजा के विषय में कोई शास्त्रीय निषेध नहीं है।
शास्त्रीय दृष्टि
मंदिर = सार्वजनिक पूजा स्थल। यहाँ सभी — पुरुष, स्त्री, बालक, वृद्ध, विवाहित, अविवाहित — सभी दर्शन कर सकते हैं। भगवान विवाह-प्रमाणपत्र नहीं देखते — भक्ति देखते हैं।
कोई शास्त्रीय निषेध नहीं
किसी भी प्रमुख शास्त्र, आगम, पुराण, या स्मृति में 'अविवाहित युवक-युवती साथ मंदिर न जाएँ' ऐसा कोई नियम नहीं।
सामाजिक दृष्टि
कुछ रूढ़िवादी समाजों/परिवारों में अविवाहित युवक-युवती के साथ मंदिर जाने पर भौंहें उठती हैं — यह सामाजिक रूढ़ि है, शास्त्रीय नियम नहीं। परंतु सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय परिस्थिति का ध्यान रखना व्यावहारिक है।
आचरण नियम (सभी के लिए — विवाहित/अविवाहित)
- ▸मंदिर में शालीन व्यवहार
- ▸शारीरिक स्पर्श/रोमांटिक व्यवहार = पूर्णतः अनुचित (मंदिर = पवित्र स्थान)
- ▸मंदिर = भक्ति का स्थान, 'डेट' का नहीं
- ▸शुद्ध वस्त्र, शुद्ध भाव
- ▸अन्य भक्तों की भावनाओं का सम्मान
विशेष स्थिति
- ▸परिवार/मित्रों के साथ: कोई समस्या नहीं — सामान्य दर्शन
- ▸विवाह हेतु: अनेक परिवार मंदिर में मिलकर विवाह निश्चित करते हैं — शुभ
- ▸सगाई/विवाह पूर्व: मंदिर दर्शन = दोनों परिवारों सहित = शुभ
निष्कर्ष
मंदिर में भगवान सभी के हैं। अविवाहित युवक-युवती शालीन और भक्ति-भाव से दर्शन कर सकते हैं — कोई शास्त्रीय निषेध नहीं। परंतु मंदिर की गरिमा बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी।





