विस्तृत उत्तर
मंदिर परिसर में भोजन करने के विषय में स्थान, प्रकार, और मंदिर के नियम — सभी महत्वपूर्ण हैं।
कहाँ उचित — कहाँ अनुचित
1गर्भगृह/मंडप में — पूर्णतः वर्जित
देवता के सामने बैठकर भोजन करना = अशिष्ट। गर्भगृह और मुख्य मंडप भोजन स्थल नहीं हैं।
2प्रसाद भोजन स्थल/अन्नक्षेत्र — पूर्णतः उचित
अनेक मंदिरों में प्रसाद भोजन की विशेष व्यवस्था:
- ▸जगन्नाथ पुरी: 'आनन्द बाजार' — विश्व प्रसिद्ध प्रसाद भोजन स्थल
- ▸गुरुद्वारा: 'लंगर' — सर्वसुलभ सामुदायिक भोजन
- ▸तिरुपति: अन्नप्रसादम (भव्य भोजन हॉल)
- ▸ISKCON: प्रसादम वितरण
- ▸सिख/हिन्दू भंडारा: उत्सवों/पर्वों पर
3मंदिर प्रांगण/बगीचा — शर्तों सहित
कुछ मंदिरों में प्रांगण या बगीचे में प्रसाद/भोजन ग्रहण करने की अनुमति — परंतु:
- ▸केवल सात्विक भोजन (प्याज-लहसुन-मांस-मदिरा = पूर्णतः वर्जित)
- ▸गंदगी न फैलाएँ — स्वच्छता बनाए रखें
- ▸जूठन भूमि पर न फेंकें
- ▸मंदिर नियम अनुसार
भोजन के नियम (मंदिर परिसर)
- ▸केवल शाकाहारी/सात्विक
- ▸बाहर का भोजन (फास्ट फूड/पैक्ड) लाना — अधिकांश मंदिरों में अनुचित
- ▸प्रसाद श्रद्धापूर्वक ग्रहण — जूठा न छोड़ें
- ▸भोजन करने के बाद हाथ धोएँ और स्थान साफ करें
- ▸भोजन के बाद आचमन (कुल्ला) करें
शास्त्रीय दृष्टि
मंदिर का प्रसाद/भंडारा = सर्वोत्तम भोजन। गीता (3.13): 'यज्ञ का शेष (प्रसाद) खाने वाले सर्वपाप मुक्त।' मंदिर में प्रसाद भोजन = पूजा का अंग।
सावधानी
मंदिर = पवित्र स्थान, पिकनिक स्पॉट नहीं। भोजन केवल निर्धारित स्थान पर — अनुशासन से।





