विस्तृत उत्तर
जप की अवधि का नियम मंत्र महोदधि और तंत्र शास्त्र में वर्णित है:
नित्य जप — आजीवन
धर्म सिंधु: नित्य जप का कोई अंत नहीं — यह जीवन का अंग है। जैसे श्वास प्रतिदिन लेते हैं — जप भी नित्य।
विशेष अनुष्ठान की अवधि
| अनुष्ठान | अवधि |
|---------|------|
| सामान्य संकल्प | 11 या 21 दिन |
| मंत्र अनुष्ठान | 40 या 41 दिन |
| पुरश्चरण | जप पूर्ण होने तक |
| नवरात्रि अनुष्ठान | 9 दिन |
41 दिन का महत्व
तंत्र शास्त्र और आधुनिक न्यूरोसाइंस दोनों के अनुसार — 40 दिन में नई आदत का निर्माण होता है। 41वाँ दिन — संस्कार पक्का।
न्यूनतम
मंत्र महोदधि: किसी भी अनुष्ठान के लिए न्यूनतम 11 दिन।
सबसे महत्वपूर्ण नियम
एक बार जो संकल्प लिया — वह पूरा करें।' बीच में छोड़ना उचित नहीं। यदि किसी कारण से रुकना पड़े — उस दिन का जप अगले दिन करें।
आजीवन जप
भागवत पुराण: 'जब तक श्वास है — नाम जपो।' जप की कोई समय सीमा नहीं।





